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यस्य दृष्टिः कृपावृष्टि-गिरः शमसुधाकिरः। तस्मै नमः शुभज्ञान-ध्यानमग्नाय योगिने ।।८।।
जिन की दृष्टि कृपा की वृष्टि है, जिन की वाणी प्रशम सुधा की बौछार करती है, जो शुभ ज्ञान-ध्यान में मग्न है, ऐसे ओ योगी ! आप को हमारे लाख लाख नमस्कार है।