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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir उप्पल भोमा नलिणु-प्पलुज्जला उप्पला य बीयम्मि । भिंगा भिंगनिभंजण, कज्जलपभ तइयए भणिया ॥२९७ ॥ सिरिकंता सिरिमहिया, सिरिचंदा पच्छिमम्मि सिरिनिलया । पासायाण चउण्हं, भवणाणं अंतरे कूडा ॥ २९८॥ अट्ठसहकूडसरिसा, सव्वे जंबूनयामया भणिया। तेसुवरि जिणभवणा, कोसपमाणा परमरम्मा ॥ २९९ ॥ देवकुरुपच्छिमद्धे, गरुडावासस्स सामलिदुमस्स। एसेव कमो नवरं, पेढं कूडा य रययमया ॥३००॥ दोसु वि कुरासु मणुआ, तिपल्लपरमाउणो तिकोसुच्चा। पिट्ठकरंडसयाई, दो छप्पण्णाई मणुयाणं ॥ ३०१॥ सुसमसुसमाणुभावं, अणुहवमाणाणवच्चगोवणया। अउणापण्णदिण्णाई, अट्ठमभत्तस्स आहारो ॥ ३०२॥ लोगस्स नाभिभूओ, नवनवइ सहस्स जोयणुव्विद्धो। मेरुगिरी रयणमओ, अवगाढो जोयणसहस्सं ।। ३०३ ॥ दस एक्कारसभागा, नउया दस चेव जोयणसहस्सा । मूले विक्खंभो से, धरणियले दस सहस्साइं ॥ ३०४ ॥ जोयण सहस्समुवरिं, मूले इगतीस जोयणसहस्सा। नवसय दसहिय तिण्णिय, एक्कारसभाग परिही से ॥३०५ ॥ धरणियले इगतीसं, तेवीसा छस्सया य परिही से। उवरि तिण्णि सहस्सा, बावटुं जोयणसयं च || ३०६ ॥ जत्थिच्छसि विक्खंभं, मंदरसिहराहि उवइत्ताणं । एक्कारसहि विभत्तं, सहस्ससहियं च विक्खंभं ॥ ३०७ ।। एमेव उप्पइत्ता, जं लद्धं सोहियाहि मूलिल्ला । वित्थारा जं सेसं, सो वित्थारो तहिं तस्स ॥ ३०८॥ २८3 For Private And Personal Use Only
SR No.020964
Book TitleShastra Sandeshmala Part 23
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVinayrakshitvijay
PublisherShastra Sandesh Mala
Publication Year2009
Total Pages430
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size14 MB
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