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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir १७ - - नकान में टपकानेकीदवापतलीहोजोशरीरके। छिद्रतथाघोंनेतथाधावसथवानारमेंटपका नापरंतकान ठंडीदवाटपकानानचाहियेजोवा सेकान मेंपीडाहीतीहै औरगाढीदवाभीनटपका नाचाहियेवाती कीतरहसे कान में लगाना चाहिये मथकमारकीरीताअर्थात्पोटलीसेसेका नासूषीदवाकोजोकुरतथाचूरनकरके वेसीही नथाकोईतेलमेंभकरोकेअथवादवाभिजोकुच लके कपडामेंदोपोटलीबांधके एककेपीछेदूसरी गरमगरमजोडपररषनामथकवसकीरीत। मूषीतथागीलीदवाको पीसकेवडीनथाछोटीटि कयावनाकेरोगकेभस्थान मेंरषकेताजेीरमु नासिवपन्नावांधनाजोदवाकीनासीरदेरताईरहै। ॥अथलवलरवहकीरीत पतलीदवाकोका ईवासनमेंरषकेसूघना तयादवाकोपोटलीमेंवा धकेभिजोके घनाप्रथलतूरवकारीता कागजकेपरचा वहुतसेबिद्रकरकेतथाकपड़गा परगाढीदवालेपके तुल्परोगकीजगैचिपकाना। प्रथमरहमकीरीतामरहमको कपडापरल गाकेचिपकाना उचित है परंतुमयेकपडाकोफा। योवनानामनें क्यों किनयोकपडादवाकेवलको सोषलेता है औरथोरेघाव में पुरानीरूई मेंमरहम लगाकेरषनासौरऊपरसेफायालगानाचाहिये। ओरनासूरवातीपरलगा : रखनाचाहियानि थमज़मज़हकारीतासर्यानकुलासरदीप्ता - - - - - - - - For Private and Personal Use Only
SR No.020831
Book TitleTibba Ratnakar
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Munshi, Bansidhar Munshi
PublisherKanhaiyalal Munshi
Publication Year1882
Total Pages292
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size24 MB
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