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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir १८२ - - Amare: - - - - वालोंकेतिलाओं तिलाजोवालवोराको दूर करें।विधिकालीवकरीकापुरजलाना गिधाकोपुरजलाडमाछिरमाशेशमाघीकीवीट माशासरसेंकि तेलमें पीसकेलगावप्रथवा नकछिकनी। मुगीके अंडे के तेल मेंघिसके लग बैथवासमुद्रफेनानेकीजड कोछिल। कारामूसेकीमैगनीकडवेवादाभकीभींगी सवय एवरलेकेसरसों के तेलमें घोटकेलगावै॥4. हाथीदांत कोथुरादो।मायीकी वीटावरावरलेके मगीकेअंडे केतेल में मिलाकेलगानिथवा वकरीके वालजलेहुए। वुजके वालजलेहए। गंधकामलासाराबरावरलेके सरसों के तेल में पीसकेजगेको घुजलाकेतिलाकरे॥तिलाजो दाढीमोरमूंछ केवालों को जमावै॥विधिास मुद्रफेनाकडवेवादाम कीमोगी। वरावरलेके पुरा नीसरसों के तेल मेंतथा मुगी के अंडे के तेल मेंपीस केलगावै॥तिला जोसवपकारकीजूत्रों को मारै विधिएलूमाहिरतालावरावरलेके लरोगन में घोल केलगावै॥भ्रथवा॥पारो।चमे लीके तेल में घिसकेलगावैनोरवालों को कपडे। सेवांधे।थवागभटबॉस केवीजाघरवूजाके वीजाराकरतोलालीलाथोथामाशायानी में पीस केलगावैदोपहरपीछे धोडालेनिथवागवाक लाकोचूना मस्सरको चूनाभट वांस को चूनासवा वरावरलेके पानी में घोलकेलगावै॥अथवा - - - - - - - - Ray Pram For Private and Personal Use Only
SR No.020831
Book TitleTibba Ratnakar
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Munshi, Bansidhar Munshi
PublisherKanhaiyalal Munshi
Publication Year1882
Total Pages292
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size24 MB
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