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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir सूत्रकृताङ्गस्ने मम्-आसंदियं च नवसुत्तं पाउल्लाई संकमाए। अदै पुर्त्तदोहलट्टाए आणप्पा हेवंति दासा वा ॥१५॥ छाया-आसन्दिकां च नत्रसूत्रां पादुकाः संक्रमणार्थाय । अथ पुत्रदोहदार्थाय आज्ञप्ता भवन्ति दाया इव ॥१५॥ अन्वयार्थः--(नवसुतं च आसं दय) नः सूत्रामासंदिकां च-नवमूत्रनिर्मिता मंचिका (संकमाए) संक्रमणार्थाय (पाउल्लाइ) पादुका:-काष्ठपादुकाः (अदु) अथ (पुत्तदोहलढाए) पुत्रदोहदार्थाय (दासा वा) दासा इव (आणपा) आसप्ताः (हवंति) भवन्ति-स्त्रीवशीकृताः साधवः स्त्रियाः दासा इव भवन्तीति ॥१५॥ शब्दार्थ-'नवसुत्तं च आसंदियं-नवसूत्राम् आसंदिकाम्' नये स्वतों से बनी हुई सोने बैठने के लिये एक मंचिया लामो 'संक्रमट्ठाए-संक्रमणार्थाय' घूमने के लिये 'पाउल्लाइं-पादुकाः' काष्ठ की पादुकाएं लामो 'अदु-अथ' और 'पुत्तदोहलहाए-पुत्रदोहदार्थाय' मेरे गर्भस्थित पुत्र के दोहद की पूर्ति के लिये अमुक अमुक वस्तु लामो इस प्रकार साधु 'दासा वा दासा इव' दास के जैसे 'आणप्पा-आज्ञता' आज्ञाकारी 'हवंति-भवन्ति' होते हैं ॥१५॥ __ अन्वयार्थ--नवीन सूत से पनी मंचिया लाओ, चलने फिरने के लिये खडाउँ लाओ। पुत्रदोहद गर्भस्थित पुत्र की इच्छा को पूर्ण करने के लिये अमुक अमुक वस्तुएं लाओ। इस प्रकार स्त्रियां अपने वश में हुए उन साधुओं को दास के समान आज्ञा देती हैं ॥१५॥ ___ -'नवसुत्तं च आसंदिया-नवसूत्राम् आसंदिकाम्' सुका मेसपान भाटे नवा हराथा (पाटीथी) मना। ४ ५ वाव तथा 'संकमाए-संक्रमणार्थाय' ५२१॥ भाटे पाउल्लाई'-पादुकाः' सानी पावडीसी (यामी) सावी आयो ‘अदु-अथ' भने 'पुतदोहलढाए-पुत्रदोहदार्थाय' विथाना stनीति भाट भभु: अभु १तु साथी मा मत साधुमे। 'दासा वा-दास इव' हा अथात् सेनी मा 'आणप्पा-आज्ञप्ताः' माild 'हवंतिभवन्ति' थाय छे. ॥१५॥ સત્રાથ–આપણે શયન કરવા માટે નવી પાટી ભરેલી ઢયણ (નાને હેલિ) લાવી દે. મારે માટે લાકડાની પાવડીઓ લાવી આપ. ગર્ભસ્થ પુવદેહદ પૂર્ણ કરવાને માટે વિવિધ વસ્તુઓની પણ તે માગણી કરે છે. આ પ્રકારે પિતાને વશ થયેલા તે સંયમભ્રષ્ટ સાધુને દાસ જેવા ગણીને સ્ત્રીઓ વિવિધ આજ્ઞાઓ કરે છે. ૧૫ For Private And Personal Use Only
SR No.020779
Book TitleSutrakritanga Sutram Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherJain Shastroddhar Samiti
Publication Year1969
Total Pages729
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_sutrakritang
File Size14 MB
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