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जे जंबूरी मां मेरुपर्वत होडीना स्तंजनी पेठे रहेलो बे. वल्ली जंबूद्धीपनी बहा रना बीजा द्वीपो निरंतर होडी चलाववाना चाटवा सरखा रहेला बे. तेमज अरण्य | जेवो विशाल श्राकाश शढनी पेठे रहेलो बे. एवो ते जंबूद्वीप समुद्रना मध्यभागने विषे पामवा योग्य वर्त्ते बे ॥ २ ॥ पृथ्वी उपर रहेलो एवोय पण जे जंबूद्वीप, पोताना
पायते मेरुरथांतराणि, दीपान्यंरित्रति सदैव यंत्र ॥ पॅटायते व्योमवनं से जंबूद्वीपचं लैज्योतति सागरांतः ॥ २ ॥ राकाशशांक 'निजवृत्ततो यो, 'विडंबयामास मुवि स्थितोऽपि ॥ मध्ये सैदा यस्य कैलंकलीलां, "बिनर्ति नीलं वैननऽशालम् ॥ ३ ॥
दम्मेशना गोलपणाथी पूर्णिमाना चंद्रने विटंबना पमाडे बे. चंद्र जेवा अन्य धर्म तो जंबूद्धीपमां बे ज; जेम के जे जंबूद्धी पना मध्यजागने विषे वर्त्ततुं लीलुं नद्रशाल नामनुं वन, चंडना कलंकनी शोजाने हम्मेश धारण करे बे. ॥ ३ ॥
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