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संपन छे पण जातिसंपन्न नथी, ३ एक उभयसंपन्न छे अने ४ एक उभयसंपन्न नथी. (२), एवी रीते जातिथी रूपनी साथे चतुभंगी करवी (३), एमज जातिथी श्रुतनी साथे चतुर्भगी (४), एमज जातिथी शीलनी साथे चतुभंगी (५), एम जातिथी चारित्रनी साथे चतुर्भगी (६), एम कुलथी बलनी साथे चतुभंगी (७), कुल अने रूपनी साथे चतुभंगी (८), कुल अने श्रुतनी साथे चतुर्भगी (९), कुल अने शीलनी साथे चतुभंगी (१०), कुल अने चारित्रनी साथे चतुभंगी (११), चार प्रकारना पुरुष कहेला छे, ते आ प्रमाणे-एक पुरुष बलसंपन्न छे पण रूपसंपन्न नथी, एम बल अने रूपनी चतुर्भगी जाणवी. (१२), एम बल अने श्रुतनी साथे चतुर्भगी (१३), एम बल अने शीलनी साथे (१४), एमज बल अने चारित्रनी साथे चतुभंगी कहेवी. (१५) चार प्रकारना पुरुष कहेला छे, ते आ प्रमाणे-एक पुरुष रूपसंपन्न छे पण श्रुत(ज्ञान)संपन्न नथी, एम रूप अने श्रुतनी चतुभंगी (१६), एम रूप अने शीलनी साथे चतुभंगी (१७), रूप अने चारित्रनी साथे चतुभंगी (१८), चार प्रकारना पुरुष कहेला छे, ते आ प्रमाणे-एक पुरुष श्रुतसंपन्न छे पण शीलसंपन्न नथी, एम श्रुत अने शीलनी चतुभंगी (१९), एम श्रुत अने चारित्रनी चतुर्भगी (२०), चार प्रकारना पुरुष कहेला छे, ते आ प्रमाणे-एक पुरुष शीलसंपन्न छ पण चारित्रसंपन्न नथी, एम शील अने चारित्रनी चतुभंगी करवी (२१). आ बधा मळीने २१ भांगाओ (चतुर्भगीरूप ) कहेवा. चार प्रकारना फळो कहेला छे, ते आ प्रमाणे-१ कोई एक फळ आमळाना जेवू मधुर छे, २ कोईक द्राक्षना जेवु मधुर छे, ३ कोईक दूधना जेवू मधुर छे अने ४ कोईक खांडना जेवू मधुर छे. आ दृष्टांते चार प्रकारना आचार्यों कहेला छे, ते आ प्रमाणे१ कोईक आचार्य आमळाना फळ समान मधुर अर्थात् कंईक मधुर वचन अने उपशमादि गुणवान छे, २ कोईक द्राक्ष समान
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