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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www. kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir राजचिंथा। [२] और न शरीरके विनाजीवकी । संख्या १३ ॥ संख्या १४ छत्तीस लक्षणों से राज्य है संख्या १४ संख्या १५ छत्तीस लक्षणोंसे हीन शनैः शनैः नाशहोजाता है संख्या १५ ॥ बल का संकेत त्रिकोणाकार है संख्या १६ ॥ बुद्धिका संकेत वर्ग चतुष्कोणाकार संख्या १७ ॥ बल बुद्धि का संकेत वर्ग त्रिकोणाकार है संख्या ३८॥ संख्या १९ राजविद्या के अभाव से बुद्धि में हीनता आती है । स्वार्थ सुख भोगेश्वर्य मोह की आधिकता में जादापड़ने स मूल सहित नाश को प्राप्त होजाता है। संख्या १९ ॥ संज्ञा-२० साक्षी सबको देखता है ईश्वर को साक्षी जानताहुवा उञ्चपद को पाता है ! ॥ ६१ सर्वोपरि प्रभु ने पांच तत्वोंसे ब्रह्माण्डकी उत्पत्ति के है फेर डमरु के सकाश से सात स्वरोसे सृष्टि की स्थिति के वास्ते सुख शान्ति स्थिति ( भोग) वृद्धि ( ऐश्वर्य) स्वास्ते आयुस और For Private And Personal Use Only
SR No.020594
Book TitleRajvidya
Original Sutra AuthorN/A
AuthorBalbramhachari Yogiraj
PublisherBalbramhachari Yogiraj
Publication Year1930
Total Pages308
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size14 MB
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