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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir ठाणो ठाठ ( ४६६) ठाठ-३० ठाट। ठाडोळाई-दे० ठाडोळ। ठाठियो-(न०) १. 'ठाट' का तुच्छता सूचक ठाढ़-दे० ठाड । शब्द । २. कूटे का बनाया हुआ छोटा ठाढो-दे० ठाडो। बरतन । ३. ठाठा-ठाठिया प्रादि कूटे के ठारण-(ना०) १. मवेशी को घास डालने का बरतन, खिलौने बनाने वाला व्यक्ति । का स्थान । २. मवेशी को बांधने का ठाठी-(ना०) आड़ । रोक । विघ्न । स्थान । ३. तबेला । ४. स्थान । जगह । ठाठो-(न०) १. ढाँचा । २. कूटे का बनाया ५.वंश । कुल । ६. घोड़ी की प्रसव दशा। हुआ एक बरतन । ३. शरीर । ४. शव। ७. घोड़ी का प्रसव । लाश । ५. हड्डियों का ढाँचा। पंजर। ठाणणो-(क्रि०)१. विचार करना । निश्चय ६. बारणों को रखने का ऊंट के चमड़े से करना। २. रचना । रचना करना । ३. बना एक थैला । चोंगा। तरकश। किसी काम को करने का दृढ़ निश्चय ठाड-(ना०) ठंड । शीत । करना । ४. तत्परता से प्रारंभ करना। ठाडक-(ना०) १. ठंडक । २. शान्ति । ठाण देणो-(मुहा०) घोडी का प्रसवना । ठाडी-(ना०) १. राख । भस्म । २. सर्दी। घोडी का बच्चा देना। जाड़ा। शीत। ३. ठंडी । शीतलता। ठाणपूर-(वि०) १. अपने पद, कुल और (वि०) १. सुस्त । २. ठंडी। शीतल । व्यक्तित्व इत्यादि की परम्परागत प्रतिष्ठा ३. बासी। को निभाने वाला तथा इनकी कीत्ति को ठाडो-(वि०) १. ठंडा । शीतल । २. ताजा बढ़ाने वाला। वंश वर्धन । २. अपने नहीं । बासी। ३. मंद । सुस्त । धीमा। स्थान पर शोभा देने वाला। ३. उच्च (न०) १. व्रण अथवा किसी दर्द के कुल में उत्पन्न । कुलवान । खानदानी । स्थान को गरम शलाका द्वारा दागने की ४. प्रतिष्ठिा । ५. रोबदार । ६.अपने पद क्रिया । २. दागने का निशान । दाग ।। या स्थान की मान-मर्यादा रखने वाला। डाम । चुहियो। ३. शीतला देवी को भेंट ठाण सिणगार-(वि०) १. एक जगह पड़ा धरने के लिये एक दिन पहिले बनाया हुआ __रहने वाला। २. किसी के काम नहीं बासी भोजन । ४.(भू००) खड़ा । स्थिर।। आने वाला । निकम्मा । निठल्ला। . ठाडोगार-दे० ठंडोगार। ठाडो टीप-(वि०) अत्यन्त ठंडा। ठाणा-(न००व०) जैनधर्म के तेरहपंथी या ठाडो ठरियो-दे० ठंडो-ठरियो। बाईस टोले के साधुनों की संख्या का ठाडो-पहोर-(न०) गरमी की मौसम में नाम । संख्या । गिनती। ठाणांग-(न0) जैन धर्म का स्थानांगसत्र दिन का वह समय जब सूर्य तपा न हो। ग्रंथ। अथवा अस्त होने जारहा हो। प्रातःकाल या ढलते दिन का समय । ठाणियो-(न०) १. तबेले का नौकर । ठाडो पेट-(न०) १. बड़ी-बूढी स्त्रियों द्वारा साहरणी। २. मवेशी के लिये कुतर, ग्वार, सौभाग्यवती स्त्रियों को दिया जाने वाला बाजरी आदि का मिश्रण पकाने का स्थान पुत्रवती होने का आशीर्वाद । २. स्वास्थ्य व पात्र । दे० दळियो। ३. दे० ठाण की दृष्टि से पेट का ठंडा रहना । सं० १ और २। ठाडो-बासी-दे० ठंडो बासी । ठाणो-(न०) जैन साधु । (क्रि०)१. स्थापित .ठाडोळ-(ना०) ठंडक । शीतलता। करना । २. ठानना । निश्चित करना । For Private and Personal Use Only
SR No.020590
Book TitleRajasthani Hindi Shabdakosh Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorBadriprasad Sakariya, Bhupatiram Sakariya
PublisherPanchshil Prakashan
Publication Year1993
Total Pages723
LanguageHindi
ClassificationDictionary
File Size12 MB
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