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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www. kobatirth.org ( ३३ ) यस्ताँस्त्यजति शब्दादीन् सर्वाश्च व्यक्तयस्तथा । विमुञ्चेत् प्राकृतान् ग्रामाँस्तान् मुक्त्वामृतमश्नुते वह जो उन शब्द आदि सब दृश्यों को त्यागता है और संसारिक पदार्थों को छोड़ता है, अमर पद को प्राप्त होता है । Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir He who forsakes '] 1 ose perceptible souids and 'other materi l objects, becomes immort id thereby. गावो प्राणेन पश्यन्ति वेदः पश्यन्ति पण्डिताः । चारैः पश्यन्ति राजानश् चक्षुभ्याम् इतरे जनाः ॥ पशु नाक द्वारा देखते हैं । पण्डित लोग वेद ( विद्या ) द्वारा वस्तुओं को देखते वा जानते हैं । राजा लोग नोकरों के बसीले जानते है । अन्य लोग आंखों देखते हैं। Animals (cows) see (know) with the nose. see with the Vedas (system of knowledge ). through sovaits Opter people see with the वृहत्याः पतिः केवलः सेवनीयः मनुष्यैः सदा वेदमंत्रः परोक्षः । तदर्थे ऽलं शुद्धचितं लगित्वा मनः सत्यभावेन भक्तया महत्या ॥ आदमियों को उचित है कि ज़मीन आस्मान के मालिक की हि वन्दगी हमेशा परेकी वात वतलाने वाले वेदमंत्रों से उन के अर्थ पर स्वच्छ चित्त एकत्र करके मन के सच्चे विश्वास और वडी भक्ति से किया करें । अशम् मंगलं भगवान् विष्णुः मंगलं जीवजन्तवः मंगलं च विद्याधीता येन सुखं महद् भवेत् f Wise men Kings see eyes. Men should pray to God alone, the Lord of the heaven and earth,' always with the Vedic verses which are con - cerned with the beyond, by rivetting the sincere mind on their import with true hearty faith and great devotion. For Private And Personal Use Only
SR No.020511
Book TitleNiti Sangraha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDurgaprasad
PublisherVirjanand Yantralay
Publication Year1812
Total Pages47
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size4 MB
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