________________ Acharya Shri Kalassag y armandir Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatm.org तीर्थानि स्नानार्थ प्रतिगृह्यताम् // इति शुद्धोदकस्नानम् // 13 // इति नापयित्वा शतरुद्रियद्वारा अभिषेकं कुर्यात् // ॐ वस्त्राणि पट्टकूलानि विचित्राणि नवानि च // मयानीतानि देवेश प्रसन्नो भव शंकर // इति वस्वम् // 14 // ॐ सौवर्ण राजतं तानं कर्पासस्य तथैव च // उपवीतं मया दत्तं प्रीत्यर्थ प्रतिगृह्यताम् // इत्युपवीतम् // 15 // ॐ सर्वेश्वर जगद्वंद्य दिव्यासनसमास्थित // गंध है गृहाण देवेश चंदनं प्रतिगृह्यताम् // अंगुष्ठः कनिष्ठामूललग्नो गंधमुद्रा / इति गंधम् // 16 // ॐ अक्षताश्च सुरश्रेष्ठ शुन्ना धोताश्च नि। मलाः॥मया निवेदिता भक्त्या गृहाण परमेश्वर॥ सर्वांगुलीभिर्दद्यात् / इत्यक्षताः॥१७॥ माल्यादीनि सुगंधीनि मालत्यादीनि वै प्रभो॥ मयाहृतानि पूजार्थ पुष्पाणि प्रतिगृह्यताम् // तर्जन्यावंगुष्ठमूललग्ने पुष्पमुद्रा // इति पुष्पम् // 18 // ॐ बिल्वपत्रं मुवर्णेन त्रिशूला कारमेव च // मयापित महादेव बिल्वपत्रं गृहाण मे // इति बिल्वपत्रम् // 19 // इति पुष्पांतैरुपचारैः संपूज्य विशेषफलकांक्षी सहस्रनामभिः प्रत्येकनाम्ना पुष्पबिल्वपत्रद्वारा शिवं पूजयेत्॥ ततः प्रयोगोक्तावरणपूजां कृत्वा धृपादिपूजनं कुर्यात् / अथ धूपादिपूजनम्॥ फडिति धूपपात्रं संप्रोक्ष्य नम इति गंधपुष्पान्यां संपूज्य पुरतो निधाय '' इति वह्निबीजेन उपरि अनि संस्थाप्य तदुपरि मूलेन दशांग दत्त्वा घंटां वादयन् ॐ बनस्पतिरसोत्पन्नो गंधाट्यो गंध उत्तमः // आधेयः सर्वदेवानां धूपोयं प्रतिगृह्यताम् // सांगाय सपरिवाराय श्रीमहादेवाय धूपं समर्पयामि / इति पठित्वा देवस्य वामभागे धूपपात्रं निधाय तर्जनीमूलयोरंगुष्ठयोगो धृपमुदा तां प्रदर्शयेत् / इति धूपम्॥ // 20 // ततो दीपपात्रं गोघृतेनापूर्य मंत्राक्षरतंतुभिर्वर्ती निक्षिप्य 'ॐ' इति प्रणवेन प्रज्वाल्य घंटा वादयन् नेत्रादिपादपर्यंत दीपं / / प्रदर्शयेत् / तत्र मंत्रः ॐ आज्याक्तवर्तिसंयुक्तं वह्निना दीपितं तु यत्॥ दीपं गृहाण देवेश त्रैलोक्यतिमिरापहम् // सांगाय सपरिवाराय For Private And Personal Use Only