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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir ऋतुसंहार 857 मनोहर क्रौञ्चचनिनादितानि सीमान्ताराण्युत्सुकयन्ति चेतः। 4/8 रुचिकर कामवासना जगाने वाली वह मदिरा पीती हैं, जिसमें पड़े हुए कमल उनकी सुगंधित साँस से बराबर हिलते रहते हैं। कुर्वन्ति नार्योऽपि वसन्तकाले स्तनं सहारं कुसुमैर्मनोहरैः। 6/3 वसंत में स्त्रियाँ भी अपने स्तनों पर मनोहर फूलों की मालाएँ पहनने लगी हैं। कुन्दैः सविभ्रमवधूहसितावदातैरुद्योतितान्युपवनानि मनोहराणि। 6/25 कामिनियों की मस्तानी हँसी के समान उजले कुंद के फूलों से चमकते हुए मनोहर उपवन। रमणीय - [ रम्यतेऽत्र - रम् आधारे अनीयर] सुहावना, आनंदप्रद, प्रिय, मनोहर, सुंदर। बहुगुणरमणीयः कामिनीचित्तहारी तरुविटपलतानां बान्धवो निर्विकारः। 2/29 अपने बहुत से सुंदर गुणों से सुहावनी लगने वाली, स्त्रियों का जी खिलाने वाली, पेड़ों की टहनियों और बेलों की सच्ची सखी। बहुगुणरमणीयो योषितां चित्तहारी परिणतबहुशालिव्याकुलग्राम सीमा। 4/19 अपने अनेक गुणों से मन को मुग्ध करने वाली और स्त्रियों के चित्त को लुभाने वाली है, जिसमें गाँवों के आस-पास धानों के खेत लहलहाते हैं। 5. रम्य [रम्यतेऽत्र यत्] सुहावना, सुखद, आनंदप्रद, रुचिकर। दिनान्तरम्योऽभ्युपशान्तमन्मथो निदाघकालोऽयमुपागतः प्रिये। 1/1 प्रिये! गरमी के दिन आ गए हैं। इन दिनों सांझ बड़ी लुभावनी होती है और कामदेव तो एक-दम ठंड पड़ गया है। कमलवनचिताम्बुः पाटलामोदरम्यः सुखसलिलनिषेकः सेव्यचन्द्रांशुहारः। 1/28 कमलों से भरे हुए और खिले हुए पाटल की लुभावनी गंध में बसे हुए जल में स्नान करना बहुत सुहाता है और जिन दिनों चंद्रमा की चाँदनी और मोती के हार बहुत सुख देते हैं। काशांशुका विकचपद्मनोज्ञवक्त्रा सोन्मादहंसरव नूपुरनाद रम्या। 3/1 For Private And Personal Use Only
SR No.020427
Book TitleKalidas Paryay Kosh Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorTribhuvannath Shukl
PublisherPratibha Prakashan
Publication Year2008
Total Pages441
LanguageHindi
ClassificationDictionary
File Size15 MB
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