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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org २८९ पाकिट (हिंदी में स्त्रीलिंग भी) । -कट, -कतरा - पु० जेब कतरनेवाला, पाकिटमार । - खर्च - पु० निजी खर्च; निजी खर्चके लिए मिलनेवाली रकम । - खास - पु० राजा, बादशाह के निजी खर्चके लिए राज्यकोशसे दिया जानेवाला धन । - घड़ी - स्त्री० जेब में रखनेकी (छोटी) घड़ी । जेबी - वि० [अ०] जेब में रखने लायक; छोटा । जय - वि० [सं०] जीतने योग्य, जेतव्य । जेर- स्त्री० आँवल । ज़ोर-अ० [फा०] नीचे, तले । वि० कमजोर, दबा हुआ । स्त्री० अरबी-फारसी लिखावटमें इ, ई और एकी मात्रा । - जामा - पु० वह कपड़ा जिसे घोड़ेकी पीठपर डालकर ऊपर जीन कसते हैं । तजवीज़- वि० विचाराधीन, जिसपर विचार हो रहा हो, अनिणींत ( मुकदमा ) । - बार - वि० बौझके नीचे दबा हुआ; ऋणग्रस्त; भारी खर्च, आर्थिक हानि उठानेवाला । जेरना * - स० क्रि० उत्पीड़ित करना, परेशान करना । जेरिया, जेरी - स्त्री० चरवाहेका डंडा; खेतीका एक औजार । जेल - पु०, स्त्री० [अ०] कैदखाना, बंदीगृह; * जंजाल, खाना-पु० कैदखाना, कारागार । मु०काटना- कैद की सजा भुगतना । बंधन | जेलर - पु० [अ०] जेलकी देखभाल करनेवाला अफसर । जेवड़ी - स्त्री० दे० 'जेवरी' । जेवना - स० क्रि० दे० 'जीमना' । जेवनार - स्त्री० भोज, दावत । जेवर - पु० एक चिड़िया; दे० 'जेवर' । स्त्री० रस्सी । जेवर - पु० [फा०] गहना, आभूषण; शोभारूप वस्तु, शृंगार । जेवरा* - पु० फंदा, रस्सी । जेवरी* - स्त्री० रस्सी । जेह-स्त्री० [फा०] कमानका चिला; लैस, फीता; दीवार में नीचे की ओर किया हुआ कुछ अधिक मोटा पलस्तर । जेहन - पु० दे० 'जेल' । - दार- वि० तीक्ष्णबुद्धि । जेहर* - पु० पाजेब | जेहरि, जेहरी* - स्त्री० दे० 'जेहर' | जेहि * - सर्व० जिसे; जिससे । . जे - पु० [अ०] धारणाशक्ति; बुद्धि, समझ । जै - + वि० जितने । * स्त्री० दे० 'जय' । -कार- पु० दे० 'जयकार' । - माल, - माला - स्त्री० दे० 'जयमाला' | जैत - पु० एक पेड़ । * स्त्री० जीत, जय । - पत्र - पु० जय पत्र । - वार- वि० जीतनेवाला, विजेता | जैतून - पु० [अ०] एक सदाबहार पेड़ जिसका फल खाया और बीजोंका तेल खाने और दवाके काम में लाया जाता है। जैन - पु० [सं०] जिनकी उपासना करनेवाला धर्म, अहिंसाको माननेवाला भारतका एक निरीश्वरवादी संप्रदाय । जैनी - पु० जैन धर्मको माननेवाला । जैनु* - पु० भोजन | जैमिनि - पु० [सं०] पूर्वमीमांसा दर्शन के प्रवर्तक एक मुनि जो वेदव्यासके शिष्य थे । - दर्शन- पु० पूर्वमीमांसा । लदार पु० [अ०] वह कर्मचारी जिसके जिम्मे कई गाँवोंकी तहसील आदि हो । Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir जेबी-जोगीश्वर जैस * - वि० जैसा । जैसा - वि० जिस तरहका, याध्श; जितना; सरीखा, सदृश । .- (से) को तैसा - जो जैसा है उसके साथ वैसा (व्यवहार) । जैसे- अ० जिस तरह, जिसरीतिसे । - जैसे- अ० ज्यों-ज्यों । जैसो* - वि० दे० 'जैसा' | जो - अ० दे० 'ज्यो' । -जाँ - अ० दे० ज्यों - ज्यो” । जाँक- स्त्री० पानीका एक कोड़ा जो प्राणियोंकी देहमें चिपककर उनका रक्त पीता है, जलौका, जलसर्पिणी । जो की स्त्री० पानीके साथ जोंक पी जानेसे गाय-बैल आदि के पेट में होनेवाली जलन; पानीका एक कीड़ा; जोंक । जोरी, जो धरी- स्त्री० छोटे दानेकी ज्वार । जो धेया" - स्त्री० चाँदनी । जो- सर्व० संबंधवाचक सर्वनाम | अ० यदि, अगर । - पै* - अ० अगर, यद्यपि । जोअना* - स० क्रि० दे० 'जीवना' । जोइ * - स्त्री० दे० 'जोय' । सर्व० दे० 'जो' | जोइसी* - पु० दे० 'ज्योतिषी' । जोउ०- सर्व० दे० 'जो' । जोख - स्त्री० जोखनेकी क्रिया या भाव; तौल । जोखना- स० क्रि० तोलना; * सोचना, विचारना । जोखम - स्त्री० दे० 'जोखिम' | जोखा - पु० हिसाब (प्रायः 'लेखा' के साथ : प्रयुक्त) जोखिउँ * - स्थी० दे० 'जोखिम' | जोखिता* - स्त्री० दे० 'योषिता' । जोखिम - स्त्री० हानि, अनिष्ट, घाटेकी संभावना; खतरा; ऐसी चीज जो विपत्तिका कारण हो । -का काम - खतरेका काम | मु० - उठाना, - लेना - जोखिमवाला काम करना, हानि या अनिष्टका खतरा लेनेको तैयार होना । जोखिमी - वि० जिसमें जोखिम हो । जोखाँ-- स्त्री० जोखिम, खतरा । जोग - पु० दे० 'योग' । वि० दे० 'योग्य' । अ० को, के लिए (जोग लिखी से ) । - माया - स्त्री० दे० 'योगमाया' । - साधन- पु० तपश्चर्या । जोगड़ा - पु० नकली योगी । जोगन - स्त्री० दे० 'जोगिन' | जोगवना * - स० क्रि० हिफाजत से रखना; इकट्ठा करना; ध्यान न देना; पूरा करना; आदर करना । जोगानल - पु० योगसे उत्पन्न अग्नि । जोगिंद* - पु० दे० ‘योगींद्र’। जोगि* - स्त्री० दे० 'जोगिन' । जोगिन स्त्री० जोगी स्त्री या जोगीकी स्त्री; पिशाचिनी; एक रणदेवी । जोगिनी - स्त्री० दे० 'योगिनी'; दे० 'जोगिन' । जोगिया - वि० जोगका, जोगीका; गेरूके रंगका, भगवा | पु० जोगिया रंग; जोगीड़ा; जोगी । जोगींद्र - पु० दे० ' योगींद्र' । जोगी - पु० दे० 'योगी'; भिक्षाजीवी गृहस्थ साधु | जोगीड़ा - पु० वसंतमें गाया जानेवाला एक तरहका चलता गाना; इस प्रकारका गाना गानेवालोंका समाज । जोगीश्वर, जोगेश्वर - पु० दे० 'योगीश्वर' | For Private and Personal Use Only
SR No.020367
Book TitleGyan Shabdakosh
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGyanmandal Limited
PublisherGyanmandal Limited
Publication Year1957
Total Pages1016
LanguageHindi
ClassificationDictionary
File Size28 MB
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