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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir [ 260 ] The Text begins Fol 1b. ॐ ह्री नमः॥ अथ भक्तामरस्तोत्र लिख्यते ॥ भक्तामरप्रणतमौलिप्रमाणामुद्योतकंदलितपापतमोवितानं । सम्यक् प्रणम्य जिनपादयुगं युगादावालंबनं भवजले पततां जनानां ॥ यः संस्तुतः सकलवाङ्मयतत्त्वबोधादुद्भूतबुद्धिपटुभिः सुरलोकनाथै स्तोत्रैर्जगत्रितयचित्तहरैरुदा स्तोष्ये किलाहमपि तं प्रथम जिनेंद्र॥ युग्मं बुद्धया विनाऽपि विबुधार्चितपादपीठस्तोतु समुद्यतमतिर्विगतनपोहं बालं विहाय जलसंस्थितमिंदुविंबमन्यः क इच्छति जनः सहसा गृहीतु ॥ The Text ends Fol 12a. वृहनिगड़कोटिनिघृष्टजंघाः त्वन्नाममंत्रमनिशं मुजा स्मरंतः सद्यः खयं विगतबंधभया भवंति ॥ मत्तद्विर्षेद्रमृगराजदवानलाहि संग्रामवारिधिमहोदरधनोत्थ तस्याशुनाशमुपयाति भयं भियेव यस्तावकं स्तमिमं मतिमानधीते ॥ स्तोत्रस्रजं तव जिनेंद्रगुणैर्निबद्धां भक्तया मया रुचिरवर्णनविचित्रपुष्पां धत्ते जनो य इह कंठगतामजस्र तं मानतुंगमवशा समुपैति लक्ष्मीः ॥ The Commentary begins Fol 1b. अव भक्तामरस्तोत्रका टवार्थ लिषीये है दुसरे श्लोकके अंतिके पदसे लगानां अहमपि तं प्रथमं जिनेद्र स्तोष्ये कहीये में मानतुगना मे प्राचार्यसोभीवे । पहिले जिनेश्वर रिषभदेवजी जिनकी स्तुति करुगा क्या करके जिनपादयुगं सम्यक् प्रणम्य कहीये श्रोवीतरागके चरणकमल दोनुकु नमस्कार करकै केसे है वे चरणदोनु भक्तामरकं भक्तवंत जो देवता कैसे प्रणत कं नमस्कार करते हुवे तिनके मौलि कं मस्तके मुकुटमे जो मणि क० रतन है तिनको प्रभाणामुद्योतकं क० तेजकु उद्योतकरे व ढावे है भक्तिवंतदेवतानमस्कार सिरसे ॥ The Commentary ends Fol 12b. कहीयै उस स्तोत्रपठनैबालेकु मानतुंगक० मानतुंगनामै आचार्यवां नामैबालेकु अवशा समुपैति लक्ष्मीः क० खाधीनप्राप्ति होवै लक्ष्मोस्तुतिकरणैबालैकु मानतुंग प्राचार्य इस स्तोत्रके वनानैबाले है जिनके खाधीनपणै इसलोकपरलोककी लक्ष्मी मिलै ॥ COLOPHON OF THE Text: इति भक्तामरस्तोत्र संभूर्णं ॥ COLOPHON OF THE Commentary. इति भक्तामरस्तोत्रबालावबोधसंपूर्णम् ॥ For Private and Personal Use Only
SR No.020281
Book TitleDescriptive Catalogue of Sanskrit Manuscripts Asiatic Society Vol 13 Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAjitranjan Bhattacharya
PublisherAsiatic Society
Publication Year
Total Pages293
LanguageEnglish, Sanskrit
ClassificationCatalogue
File Size12 MB
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