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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir दवनी ८८३ दशांग दवनी-संज्ञा, स्त्री० दे० (सं० दमन ) देवरी, दशगात्र- संज्ञा, पु० यौ० (सं०) मृतक के मिनाई। __ मरने पर १० दिन तक के कर्म । दरिया -संज्ञा, स्त्री० दे० (सं० दावाग्नि) दशग्रीव-संज्ञा, पु० यौ० (सं०) रावण । दवारि, दावाग्नि । दशदिक-दशदिशा-संज्ञा, स्त्री० यौ० (सं०) दवा-संज्ञा, स्त्री० (फा०) औषधि, उपचार, __ दश दिशायें । चिकित्सा । * संज्ञा, स्त्री० (सं० दव) दावा-दश दिग्पाल-संज्ञा, पु. यौ० (सं०) वरुण, नल, भाग । यौ०-दाधा-दारू। कुबेर आदि दशों दिशाओं के स्वामी। दधाई-संज्ञा, स्त्री० दे० (फ़ा० दवा) औषधि, दवा । " पाती कौन रोग की पदावत दवाई दशधा-अव्य० (सं०) दश प्रकार । दशन-संज्ञा, पु० (सं०) दाँत, दसन (दे०)। हैं"-रत्ना । दशनाम-दशनामी-संज्ञा, पु. यौ० (सं०) दवाखाना-संज्ञा, पु० यौ० (फ़ा०)औषधालय। | संन्यासियों के दश भेद, गिरि, पुरी भादि । दधाग-दघागि दघागिन - दवाग्नि-संज्ञा, स्त्री० दे० (सं० दवाग्नि ) वन की भाग, दशमलव-संज्ञा, पु० यौ० (सं० दशम + लव =खंड ) वह भिन्न, जिसका हर दश या दवारि, दवागी (दे०)। दश का कोई घात हो, दशमांश-सूचक दवात-संज्ञा, स्त्री० दे० (१० दावात) दावात चिन्ह जैसे २.५ यह अंश-सूचक अंक के मसिपात्र, दुवाइति (ग्रा.) दवायत (दे०)। वाम ओर रहता है (गणि.)। दवानल-संज्ञा, पु० यौ० (सं०) वनागी, दशमहाविद्या-संज्ञा, स्त्री० यौ० (सं०) दावाग्नि, दवारि । दश देवी। दवामी-वि० ( अ०) सदा के हेतु, स्थायी। दशमी-संज्ञा, स्त्री० (सं०) प्रति पक्ष का दवामीबंदोबस्त-संज्ञा, पु. यौ० ( फा०) दशौं दिन, दसमी (दे०)। सार्वकालिक प्रबन्ध, स्थायी प्रबंध । दशमुख-संज्ञा, पु० यौ० (सं०) रावण, दवारि, दवारी-संज्ञा, स्त्री० दे० (सं० दावाग्नि ) दावानल, वनाग्नि, वनागी। दशानन । “दशमुख सभा दीख कपि जाई" -रामा०। दषिष्ट-वि. ( सं० ) अतिदूर, अति । दशमूल-संज्ञा, पु० (सं०) दश औषधियों दधीयान्-वि० (सं०) दूरतर, अति दूरवर्ती। | की जड़ें (काथ-वैद्य० )। दशकंठ-संज्ञा, पु. यो० (सं०) रावण, दश दशमौल्य -संज्ञा, पु० यौ० (सं० ) रावण, कंध, दशकंधर, दसकंठ । “ दशकंठ के कंठन को कठुला"--राम । दशमौलि, दशभाल, दसमौलि (दे०)। दशकंठजहा-संज्ञा, पु. यौ० (सं० दशकंठज दशरथ-संज्ञा, पु० (सं० ) रामचन्द्र जी के पिता, अयोध्या के राजा, दसरथ (दे०)। +हा) मेघनाद के मारने वाले, लक्ष्मण जी। दशशीश - संज्ञा, पु० यौ० (सं० दश शीर्ष) दशकंठजित- संज्ञा, पु० (सं०) रामचन्द्र जी। रावण, दससीस (दे०)। "हम कुल-घालक दशकंध-दशकंधर-संज्ञा, पु० यौ० (सं० सत्य तुम, कुल-पालक दशशीश"-रामा०। दश+5= शिर+घर ) दशभाल, रावण । दशहरा-संज्ञा, पु० (सं०) दसहरा (दे०), " कह दसकंध कौन तैं बन्दर " । " मैं | विजया दशमी। "काल दशहरा बीतिहै, धर खुवीर दूत दसकंधर।" मूरुख जिय लाज"-वि०। दशकर्म- संज्ञा, पु० यौ० (सं०) गर्भाधान से | दशांग-संज्ञा, पु० यौ० (सं०) दश सुगंधित विवाह तक के १० संस्कार (स्मृति०)। पदार्थों से बनी पूजन की धूप । दशगंध । For Private and Personal Use Only
SR No.020126
Book TitleBhasha Shabda Kosh
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRamshankar Shukla
PublisherRamnarayan Lal
Publication Year1937
Total Pages1921
LanguageHindi
ClassificationDictionary
File Size51 MB
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