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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra संख्या प्रयोगनाम १२१२ गोकण्टकादिसिद्धयः १६५३ चन्दनादिपेया १६५४ काथ: १६५५ १६६२ " " कषायप्रकरणम् "" " 37 २२३७ तृणपञ्चमूलीपयः २२८९ त्रिफलादिकाथः मुख्य गुण चूर्णप्रकरणम् www.kobatirth.org चिकित्सा - पथ-प्रदर्शिनी १२३९ गन्धकयोगः १२७१ गुडूच्यादिचूर्णम् मूत्रमार्गगत रक्तपित्त रक्तपित्त अत्यधिक रक्त जाना रक्तपित्त कफजरक्तपित्त, तृष्णा, खांसी, ज्वर । मूत्रमार्गगत रक्तपित्त दाह, पित्तशूल चूर्णप्रकरणम् ३९ रक्तपित्ताधिकारः १२२१ गोधूमादियोगः बलवर्द्धक १६४५ चणकरसायन पित्तकफरोग, प्रमेह १६२९ घृतदध्यादियोगः वृद्धावस्था को रोकता है संख्या प्रयोगनाम देहको सुन्दर करता है | वाजीकरण २३०९ तालीस चूर्णम् १८३२ चन्दनादिलेप: गुटिकाप्रकरणम् २४१२ त्रिवृतादिमोदक: रक्तपित्त, सन्निपात ज्वर १५४४ गन्धकादिरस: १८८५ चन्द्रकलारसः १६३१ घननादादियोगः रक्तप्रवाह १७१७ चित्रकचूर्णयोगः नकसीर (नाकसे रक्त आना ) ४० रसायनवाजीकरण तथा नपुंस्कताधिकारः कषायप्रकरणम् लेपप्रकरणम् १२७५ गुडूच्यादि २. चू. १२८२ गोक्षुरचूर्णम् १२८४ गोक्षुरादिचूर्णम् १२८५ १७१८ चित्रकप्रयोग: " For Private And Personal Acharya Shri Kailashsagarsuri Gyanmandir रसप्रकरणम् १७३० चूर्णरत्नम मुख्य गुण रक्तपित्त, कफपित्तज ग्वांसी, स्वरभेद, श्वास ܕܕ [ ५५९] रक्तपित्त रक्तपित्त ऊर्ध्व तथा अधोगत रक्तपित्त, विशेषतः रक्तकी वमन और स्त्रियोंका रक्तस्राव स्मरणशक्ति वर्द्धक कुप्रयोगजनित नपुंसकता अत्यन्त वाजीकरण " " बल, कान्ति, आयु और मेधावर्द्धक वीर्यवर्द्धक
SR No.020115
Book TitleBharat Bhaishajya Ratnakar Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNagindas Chaganlal Shah, Gopinath Gupt, Nivaranchandra Bhattacharya
PublisherUnza Aayurvedik Pharmacy
Publication Year1928
Total Pages597
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size15 MB
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