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________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir प्रतिमधुरम् प्रतियवः अतिमधुरम् ati-madhuram-मल. मुलेली mosa) प० मु० । “अतिमुत्र कमिच्छन्ति (Glycyrrhizie "Radix' glabra, वासन्ती माधवीलताम् ।" हला० ५४। Liun. ) स० का. इं०। वासन्ती । तिनिश । मे० तचतुष्क । या० उ० अतिमधुरम्-पालु ati-madhuram palu १३ अ० गाव, तेंद । भा० पू० १ भा०। -ते. मुलेटी का सत-हि। Glycyrrhi- . गुण----कसेली, शीतल, ४ मघ्न, पित्त, दाह,. za ( Extract of-)। स० फा० ई०। । ज्वर, उन्माद, हिक्का, तथा छर्दिनाशक है। ग. अति-मधुरमुati-nnadhuramti-ते. ) नि०व०१०। देखो-तिनिशः । माधवी मधुर, प्रतिमधुरा ati-nadhura-कना. शीतल, लधु तीनों दोषोंको नाश करने वाली है। मुलेडी (Liquorice root) स० फा० मा०पू० १ भ .पु०२० । -(का) हरिमन्थ । . हारा० । (५) मरुना का पौधा । मतिमन्थः,-क: ati-manthah, kah-सं० अतिमुक्त तैलम् ati-mukta-tailam- सं. क्ली श्रतिमुक्रा के बीज का तेल, अतिमुक्रक पुअरनी, अरणी, अग्निमन्ध ( IPremna } बीज तेल। serratifolia ). गुण--वातपित्तनाशक, केशवबुक अथवा प्रतिमात्रम् ati-mataram-सं० ली. अधिक केश के लिए हित, श्लेष्माकारक, भारी और मात्रा (परिमाण), मात्राधिक्य । माया से शीतल है । वा० टी० हेमा। शियादा वा० स० अ० प्रतिमात्र ati-matra-हिं० वि० [सं०] .. अतिमुक्ता ati-mukta-सं. स्त्री० अति मुक्तका। रा०नि० व. १०। (Excessive) अतिशय | बहुत { ज़्यादा।। अतिमूत्र ati-mitra-हिं० संज्ञा पु० [सं०] प्रतिमानुष ati-mānusha-हिं० वि० [सं०] ( Diabetes) देचक में प्रात्रेय मत के (Super human) मनुष्य की शक्ति के , अनुसार छः प्रकार के प्रमेहीं में से एक । इसमें बाहर का । अमानुषी। अधिक मूत्र उत्तरता है और रांगी क्षीण होता प्रतिमित ati-mita-हिं० वि० [सं०] अप- जाता है। बहुमत्र।। रिमित । अतुल । बे अन्दाज । बहुत अधिक | | प्रतिमैथुनati-maithuna-हिंसंज्ञा पुतिसङ्ग, थे ठिकाना । के हिसाब । स्त्री सहवासाधिक्य, अधिक स्ली संग करना । प्रतिमुक्तः,-क: ati-muktah,-kahसं.पु०) अतिमोदा ati-modi-सं. स्त्री०, हि. संज्ञा भतिमुक्त ati-mukta-हिं० संज्ञा पु स्त्रो० (1) गुल सेवती-हि नवमल्लिका-सं० । प्रतिमुक्ताका ati-imuktaka सेउति-पं० । (Jasminumar bor-सं०पु(१)तिनिश वृक्ष । तिनसुना । तिरिच्छ। Usuni, Road.) रा०नि० २०१०। (ltomtain chomy)। अमः । (२) (२) गणिकारी बज-को। गणिरि-बं। तिन्दुक वृक्ष (See-lindukl) । तंद, ग०नि० व. १०। गान-बं०,हिं० । तत्पर्याय-पुरकः, मल्लिनी, (३)नेवारी का पौधा या फूल । भ्रमरानन्दा, कामुककान्ता-सं० । (३) नवः | अतिमोक्षा uti-mokshi-सं० स्त्रो० नेवाड़ी. मल्लिका भेद । वासन्ती, नेवारी-हि। पुष्पवृक्ष (Jasmimum rambue florरायवेल-40 रायविर-म०, ते (J. za- | ibus multiplicatils.) mbac floribus multiplientis)! अतिययः ativyavah-सं०० निःशूकयव । देखो-नवमल्लिका । (४) माधवीलता, काली यव । मद० २०१०। “निःशूकोऽतियवः कुसरी, कस्तुरमोगरा (Garthela - स्मृतः" अर्थात् जो जो शूक (सुई.) रहित हों For Private and Personal Use Only
SR No.020060
Book TitleAayurvediya Kosh Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRamjitsinh Vaidya, Daljitsinh Viadya
PublisherVishveshvar Dayaluji Vaidyaraj
Publication Year1934
Total Pages895
LanguageGujarati
ClassificationDictionary
File Size27 MB
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