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1390.]
योगविधि ( जोगविहि' )
No. 1390
Extent.- leaf 13h to leaf 174.
Description.- Complete. For further details see अरिहणास्तोत्र
No.
1392 ( 1 ), 1891-95.
Begins. --- leaf 13° ६० ॥
J
(b) Ritualistic works
Ends. - leaf 17 2
Author.- not mentioned.
Subject. A metrical composition in Prakrit in 64 verses dealing with the subject noted in No. 1389.
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नमिऊण जिणे पयओ जोगविहाणं समासओ वोच्छं । अंग सुखंधं अज्झयद्देसओ य विभक्तं ॥ १ ॥ जंमिनु अंगंमि भवे दो य सुयखंध तेहिं तु कीरंति । सुखंधस्स दिणेणं दो बि समुद्देसपुन्नाया ॥ २॥
पणयालीस दिवसा पणपालीसं निरंतरायामा |
उत्तवाणपण महानिसीहस्स जोगविही ॥ ६३ ॥ उसे जोगो कायच्चो समुद्दे से थिरे परिचयं करेज्जह 1 अन्नाए समं धारेज्जह अन्नेसिं च पविज्जह ॥ ६४ ॥
Yogavidhi (Jogavihi)
This is named as जोगविहाण in v, 1.
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1392 ( 12 ).
1891-95.
वासनिक्षेपानंतरं नित्थारगपारगा होह । नित्थारगा नियपयन्नाए । पारगा संसारसमुहस्स | नाणदंसणचरित्तलक्खणेहिं गुरुगुणेहिं वट्टेज्जाहि ॥ एगा जोगविही सम्मत्ता ॥ छ ॥ ( छ repeatd 12 times ) ॥ ६० ॥ छ
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