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__ शब्दमाला . ५९ -
शब्द / लिंग / श्लोक / अर्थ शब्द / लिंग / श्लोक / अर्थ एकदा अ. १५४२ (शे. २०४) एक साथे, | एकशङ्ग २१९ (शे. ७६) विष्णु, नारायण
एक समये | एकसर्ग न. १४५८ एकाग्र एकदा अ. १५४२ (शे. २०४) बीजे वखते | एकहायनी स्त्री १२७२ एक वरसनी गाय
एकदृश् पुं १९६ शंकर, महादेव | एकाकिन् पुं १४५७ एकलो । एकदृश् पुं ४५३ काणो, एकाक्ष (एकाक्ष) पुं ४५६ काणो, एक आंखवाळो एकदृश् पुं १३२२ कागडो
एकाग्र न. १४५८ एकाग्र एकदृश् पुं २१९ (शे. ६६) विष्णु, नारायण | 'एकाग्य' न. १४५८ एकाग्र एकधुर पुं १२६२ एक धोंसरीने वहन एकाङ्ग पुं ११७ (शे. १४) मंगल ग्रह
करनार बळद | एकाङ्ग पुं २१९ (शे.. ७१) विष्णु, नारायण एकधुरीण पुं १२६२ एक धोंसरीने वहन | एकाङ्क न. ६४१ (शे. १३१) चंदन, सुखड़
करनार बळद | एकादशोत्तम पुं २०० (शे. ४६) शंकर, (एकनेत्र) पुं १९६ शंकर, महादेव
महादेव एकपत्नी स्त्री ५२८ पतिव्रता, स्त्री एकानसी स्त्री २०५ (शे. ५६) पार्वती एकपदी स्त्री ९८३ मार्ग, रस्तो। एकान्त न. ७४२ एकांत एकपदे अ. १५३२ एकदम, तत्काल' . एकान्त न. १५०६ अतिशय, घj एकपर्णा स्त्री २०५ (शे. ५२) शंकरनी. एकान्तदुःषमा स्त्री १३१ एकांते दुःखवाळो पत्नी, पार्वती
. छट्ठो आरो, एकपाटला स्त्री १०५ (शे. ५२) शंकरनी | एकान्त सुषमा स्त्री १२९ एकांते सुखवाळो पत्री पार्वती
पहेलो आरो एकपाद् पुं १९६ शंकर, महादेव एकायन न. १४५८ एकाग्र एकपाद् पुं २१९ (शे. ७५) विष्णु, कृष्ण | एकायनगत न. १४५८ एकाग्र एकपिङ्ग पुं १८९ कुबेरदेव
एकावली स्त्री ६६१ एक सेरनो हार, कंठी एकभू पुं १०५ (शे. १४) चन्द्रमा, चन्द्र | एड पुं ४५४ बहेरो एकयष्टिका स्त्री ६६१ एक शेरनो हार, एडक पुं १२७६ घंटुं
.... कंठी ... | एडगज पुं ११५८ कुंवाडियो, एकवर्षा स्त्री १२७२ एक वरसनी गाय
पुंवाडीआनुं वृक्ष एकशफ पुं १२३३ (शे. १८०) घोडो । एडमूक पुं ३४८ बहेरो अने मूगो