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________________ ५३० पुद्गल-कोश पुद्गलों का ज्ञान पंचेदियतिरिक्खजोणियाणं पुच्छा, गोयमा! अत्थेगइया जाणंति पासंति आहारति १ अत्थेगइया जाणंति नपासंति आहारेंति २ अत्थेगइया ण जागंति पासंति आहारेंति ३ अत्थेगइया ण जाणंति ण पासंति आहारेंति ४ एवं मणूस्साण वि। -पण्ण • पद ३४ । सू २०४३.४४ कतिपय पंचेन्द्रिय तिर्यंच (आहार्यमाण पुद्गलों को ) जानते हैं, देखते हैं और आहार करते हैं १ कतिपय जानते हैं, देखते नहीं हैं और आहार करते हैं २ कतिपय जानते नहीं हैं, देखते हैं और आहार करते हैं ३ कतिपय पंचेन्द्रिय तिर्यच न जानते हैं और नहीं देखते हैं किन्तु आहार करते हैं। इसी प्रकार मनुष्यों के विषय में जानना चाहिए । पुद्गलों का ज्ञान वाणमंतर-जोतिसिया जहा रइया। -पण्ण० पद ३४ । सू २०४५ वाणव्यन्तरों और ज्योतिष्कों का कथन नरयिकों के समान समझना चाहिए। पुद्गलों का ज्ञान वेमाणियाणं पुच्छा। गोमया! अत्थेगइया जाणंति पासंति आहारति ? अत्थेगइया ण जाणंति ण पासंति आहारति । से केण? णं भंते ! एवं वुच्चति अत्थेगइया जाणंति पासंति आहारेति अत्थेगइया ण जाणति ण पासंति आहारति ? गोयमा! वेमाणिया दुविहा पण्णत्ता, तंजहा-माईमिच्छद्दिहिउववण्णगा य अमाईसम्मद्दिट्ठिउववण्णगा, एवं जहा इदियउद्देसए पढमे भणितं जहा भाणियन्वं जाव से तेणटुण गोयमा! एवं बच्चति । -पण्ण० पद ३४ । सू २०४६ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.016030
Book TitlePudgal kosha Part 1
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMohanlal Banthia, Shreechand Choradiya
PublisherJain Darshan Prakashan
Publication Year1999
Total Pages790
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationDictionary & Dictionary
File Size12 MB
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