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राजस्थान उच्च न्यायालय
जोधपुर
दिनांक 14-10-75
मा० मुख्य न्यायमूर्ति
प्रकाश नारायण सिंहल प्रिय श्री पाटनीजी,
वीर-निर्वाण-स्मारिका-हेतु आप ने मेरा सन्देश चाहा जिसके लिए हार्दिक धन्यवाद।
आपके इस पुनीत कार्य के लिए आपको हार्दिक धन्यवाद देते हुए स्मारिका के सफल सम्पादन के लिए हार्दिक शुभकामनायें प्रेषित हैं। मैं पाशा करता हूँ कि यह स्मारिका अहिंसा एवं विश्वमैत्री के महानतम सिद्धान्तों के प्रणेता एवं प्रतिपादक भगवान महावीर के पावन सन्देश के व्यापक प्रचार एवं प्रसार द्वारा जन साधारण को इन सिद्धान्तों को सही अर्थ में समझकर जीवन में उतारने की प्रेरणा एवं स्फूति देगी।
भवदीय शुभेच्छ (प्रकाश नारायण सिंहल)
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