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________________ १६४ जैन विद्या के आयाम खण्ड-७ २५ १६. 'अप्पेगे हिंसिंस मे त्ति वा, अप्पेगे हिसंति वा, अप्पेगे हिंसिस्संति आचारांगसूत्र, संपा०- मधुकर मुनि, प्रका०- श्री आगम वाणे वधेति। प्रकाशन समिति, ब्यावर, १९८४, ५/३/१५९ । आचारांगसूत्र, संपा०- मधुकर मुनि, प्रका०- श्री आगम तथा देखिए-अप्पाणमेव जुज्झाहि किं ते जुज्झेण बज्झओ? प्रकाशन समिति, ब्यावर, १९८४, १/६/५२; उत्तराध्ययनसूत्र, संपा०- मधुकरमुनि, प्रका० श्री आगम प्रकाशन १७. इमस्म चेव जीवियस्स परिवंदण-माणण-पूयणाए, जाई-मरण- समिति, ब्यावर, ९/३५ मोयणाए दुक्ख पडिघातहेतुं'--वही १/७ २४. उत्तराध्ययनसूत्र संपा० मधुकर मुनि, प्रका०- श्री आगम १८. थीभि लोए पव्वहिते। प्रकासन समिति, ब्यावर, १/१५; ते भो! वदंति एयाई आयतणाइं-वही २/४/८४ कौटिलीय अर्थशास्त्र, संपा०- उदयवीर शास्त्री प्रका०- मेहरचन्द १९. पद्मपुराण, संपा०- पं०- पन्नालाल जैन, प्रका०- भारतीय लक्ष्मणदास, दरियागंजए दिल्ली, १९७० २१/६/७ ज्ञानपीठ, काशी, सर्ग ३३ २६. वही ४६/६/७ २०. हरिवंशपुराण, संपा- पं० दरबारी लाल न्यायतीर्थ- २७ निरयावलिकासूत्र संपा०- मधुकर मुनि, प्रका०- श्री आगम प्रका०- माणिकचन्द दिगम्बर जैन ग्रन्थमाल समिति- प्रकाशन समिति, ब्यावर, १९८५, ४४/१६६ मुम्बई, सर्ग ३६ ८. जम्बूद्वीप्रज्ञप्तिसूत्र, संपा०- मधुकरमुनि, प्रका०- श्री आगम २१. पाण्डवपुराण, संपा०- जिनदास जैन कडकुलेशास्त्री, सोलापुर, प्रकाशन समिति, ब्यावर, १९८६, १८/१५२ १९८०, सर्ग १९ २९. ज्ञाताधर्मकथासूत्र संपा० मधुकर मुनि, प्रका०- श्री आगम २२: ज्ञाताधर्मकथा, संपा० - मधुकर मुनि, प्रका०- श्री आगम प्रकासन समिति, ब्यावर, १६/१९० प्रकाशन समिति, ब्यावर १५,पृ० ३६२ ३०. व्याख्याप्रज्ञप्तिसूत्र संपा० मधुकर मुनि, प्रका०- श्री आगम २३. इमेण चेव जुझहि किं ते जुझेण वज्झतो'। प्रकासन समिति, ब्यावर, १८२ ७/९/८ Jain Education Intemational For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.012065
Book TitleBhupendranath Jain Abhinandan Granth
Original Sutra AuthorN/A
AuthorSagarmal Jain
PublisherParshwanath Shodhpith Varanasi
Publication Year1998
Total Pages306
LanguageHindi, English
ClassificationSmruti_Granth & Articles
File Size10 MB
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