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________________ १३४ . सोमसेनद्वारकविरचितंimminümaninmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmmminimo यह आचार्यकी पूजाका मंत्र है । इस मंत्रसे आचार्यों गुरुओंकी पूजा करे ॥ ४४ ॥ ... ततो जिनपादार्पितचन्दनैः स्वांगमलं कुर्यात ॥ ४५ ॥ इसके बाद जिन चरणोंमें अर्पित चन्दनद्वारा अपने शरीरको भूपित करे ॥ ४५ ॥ कलशस्थापन व श्रीपीठस्थापनततः-ॐ हाँ स्वस्तये कलशस्थापनं करोमि स्वाहा॥ यन्त्रात्याकलशस्थापनम् ॥ ॐ हाँ नेत्राय संवौपटू । कलशार्चनम् ॥ ॐ हाँ स्वस्तये पीठमारोपयामि स्वहा ॥ यन्त्रात्मत्यक् पीठारोपणम् ॥ ॐ हाँ अहं क्षां ठः ठः श्रीपीठस्थापन : करोमि स्वाहा । . श्रीपीठप्रक्षालनं करोमि स्वाहा । श्रीपीठप्रक्षालनम् ॥ ॐ हाँ दर्पमथनाय नमः । पीठदर्भः ॥ ॐ हाँ सभ्यग्दर्शनज्ञानचारित्रेभ्यः स्वाहा श्रीपीठार्चनम् ।। ॐ हाँ श्री श्रीलेखनं करोमि स्वाहा । . . . श्रीकारलेखनम् ॥ ॐ हाँ श्री श्रीयन्नं पूजयामि स्वाहा । . श्रीयन्त्रार्चनम् ॥ ४६ ।। ततः इसके बाद “ओं ह्रीं स्वस्तये कलशस्थापनं करोमि स्वाहा " यह मंत्र पढ़कर यंत्रसे. पूर्वकी ओर कलशस्थापन करे । “ओं ह्रीं नेत्राय संवौषट् " यह पढ़कर कलशोंकी पूजा करे। "ओं ह्रीं स्वस्तये पीठमारोपभक्ति स्वाहा " यह पढकर यंत्रके पश्चिमकी ओर पीठारोपणं करे ।“ ॐ हाँ अहं क्षां ठः ठः श्री पीठस्थापनं करोमि स्वाहा" यह पढकर पीठ स्थापन करे । “ओं ह्रीं ह्रीं हँ ह्रीं ह्रः नमोऽहते भगवते श्रीमते पवित्रता जलेन श्रीपीठप्रक्षालनं करोभि स्वाहा" यह पढकर पीठ प्रक्षालन करे । “ओं ह्रीं दर्पमथनाय नम" यह पढकर पीठपर दर्भ रक्खे । “ओं ह्रीं सम्यग्दर्शन ज्ञानचारित्रभ्यः स्वाहा” यह पढकर पीठकी पूजा करे। “ओं ह्रीँ श्रीँ श्री लेखने करोमी स्वाहा" यह पढकर पीठपर श्रीकार लिखे । “ओं ह्रीं श्रीं श्रीं यंत्रं पूजयामि स्वाहा" यह पढ़कर श्री यंत्रकी पूजा करे ॥ ४६॥ . जिनप्रतिमास्थापनादिमंत्र- ... ॐ धाने वषट् । सिंहासनस्थजिनं श्रीपादयोः स्पृष्ट्वा प्रतिमामानयेत्॥४७॥ ___ओं धात्रे वषट् ” यह पढ़ कर निंजमंदिर, सिंहासनपर विराजमान जिन प्रतिमाको पूजाके स्थानमें लावे ॥ ४७॥ . ॐ हाँ श्रीवर्णे प्रतिमास्थापनं करोमि स्वाहा । श्रीवर्णे प्रतिमास्थापनम्॥४८॥ .
SR No.010851
Book TitleTraivarnikachar
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPannalal Soni
PublisherJain Sahitya Prakashak Samiti
Publication Year
Total Pages438
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size16 MB
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