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________________ ए वगुरुका नक्त होय ५, धनवान होय ३, रूपवान होय ४, पंमित हाय ५, पंमितसें | प्रीति होप ६. ६ कायारी थाहिंसारा कारण. जीतव्य १, पर संसार १, मान ३, पूजा ४, जन्म मरण मुकाणु ५, सुःखमीटण अर्थ ६. ६ बोल नटणेरा नकारो करणैरा लक्षण. यांख्या मीच खे १, बाघो देखें १, उंचो देखे वा नीची इष्टि घालें ३, जमोन कुतरणे लग जाय ४, सरेशु वात करण खग जाय , मुन पकाखें ६ काल विलंब करें ॥ गाथा ॥ निलमे अघालोयणं उंची परंमुहवयणं । मोनकालविलंबो नाकारे विहो होश्॥१॥ ६ थारा श्रवसर्पिणीकालका. सुखमासुखम १, सुखमा १, सुखमाखमा ३, उपमा सुखम ४, जखम , मुखमाखम ६. ६ उ बारा उत्सर्पिणीकालरा. अखमाउखम १, सुखम २, उखमासुखम ३, सुखमाउखम , सुखम ए, सुखमासुखम ६. ५५ ६ पापरा बोख. ए६ नव्य जीव हणे जितरो एक सरोवर सोष्यमें पाप १, १०१स ५४
SR No.010805
Book TitleChattrish Bol Sangraha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAgarchand Bherudan Sethia
PublisherAgarchand Bherudan Sethia
Publication Year1916
Total Pages369
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size10 MB
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