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________________ १६२ द्रव्यसंग्रह-प्रश्नोत्तरी टीका प्रयन ३१-१६वा बन्धापरारण किसया और कब होता है ? । उत्तर-- १५वें बन्धापसरण होने वाले रियतिबन्धने कम बन्ध होते होते जव शनपृथक्त्वमागर कम स्थितिबंध हो जाता है तब सूक्ष्म, पर्याप्ति, प्रत्येक शरीर, उन परस्परसंयुक्त तीन प्रकृतियोका बन्धन्युच्छेद होता है। प्रश्न ३२-- १७वां बन्धापमरण कय और किसका होता है ? उत्तर- १६वें बन्धापसरणमें होने वाले स्थितिवन्धमे कम बन्ध होते-होते जब शतपृथक्त्वनागर कम स्थितिवन्य हो जाता है तव व.दर, पर्याप्ति, साधारण शरीर, इन पररपरसयुक्त तीन प्रकृतियोका बन्धन्युच्छेद होता है। पश्न ३३ -१८वा बन्वापसरण कब और किसका होता है ? उत्तर-- १७वें वन्मापसरणमे होने वाले स्थिनिबन्धसे कम वन्व होने होते जब शतपृथक्त्वसागर कम स्थितिबन्ध हो जाता है तव वादर, पर्याप्ति, प्रत्येकाशरीर, एकेन्द्रिय, पानप मोर स्थावर, इन परस्परसयुक्त छ' प्रकृतियोका बन्धापसरण हो जाता है। प्रश्न ३४-- १६वां बन्धापसरण क्व और किसका होता है? उत्तर-१वें वापसरणमे होने वाले स्थितिवधसे कम बन्ध होते-होते जव शतपृथक्त्वसागर कम स्थिनिवच हो जाता है तव परस्परसयुक्त द्वीन्द्रियजाति व पर्याप्ति, इन दो प्रकृतियोका बन्धव्युच्छेद हो जाता है। प्रश्न ३५-२०वां वन्धापसरण कब और किसका होना है ? उत्तर- १९वे वन्धापसरणमे होने वाले स्थितिवन्धमे कम वन्ध होते होते जब शतपृथक्त्वपागर कम स्थितिवन्ध हो जाता है तव परस्परमयुक्त श्रीन्द्रियजाति व पर्याप्ति, इन दोनो प्रकृतियोका बन्धव्युच्छेद हो जाता है। प्रश्न ३६-२१वी वन्धापसरण कब और किसका होता है ? उन्नर-२०वें बन्धापसरणमे होने वाले स्थितिबन्धसे कम बन्ध होते होते जब शतपृथक्त्वसागर कम स्थितिवन्ध हो जाता है तव परस्पर संयुक्त चतुरिन्द्रियजाति व पर्याप्ति, इन दो प्रकृतियोका बन्धापसरण हो जाता है। प्रश्न ३७-२२वा बन्वापसरण कब और किसका होता है ? उत्तर-२१वें बन्धापसरणमे होने वाले स्थितिवन्धसे कम बन्ध होते होते जब शतपृथक्त्वनागर कम स्थितिवध हो जाता है तब असज्ञी पञ्चेन्द्रिय जाति व पर्याप्ति, इन परस्परसंयुक्त दोनो प्रकृतियोका बन्धव्युच्छेद होता है । प्रश्न ३८- असज्ञी पञ्चेन्द्रियजातिनामकर्म तो कोई नहीं है ? उत्तर-प्रकृतियाँ सब १४८ ही नही है, उन १४८ प्रकृतियोके और भी प्रावान्तर
SR No.010794
Book TitleDravyasangraha ki Prashnottari Tika
Original Sutra AuthorN/A
AuthorSahajanand Maharaj
PublisherSahajanand Shastramala
Publication Year1976
Total Pages297
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size15 MB
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