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________________ ३१८ ] मुंहता नैणसीरी व्यात २० चत्रभुज । २१ राव कल्याणमल फनै- . २१ मनोहरदास । सिंघरो। राजा सिंघर १८ पूरणमल दासारो। बेटां बरोबर यो । कांमां . . .. १८ रायमल दासारो। पहाड़ीरो सूबो यो । १६ रामचंद्र । २२ रिणसिंध। २० वळभद्र। २२ पाणंदसिंघ । २१ गोविंददास बळभद्रोत । २२ अजबसिंघ। ईसरदास कुंपावतरो १४ बालोजी राजा उदैकरदोहितो । रावळे वास णरो। जिणरी अोलादरा थो। रेवाड़ीरा गांव सेखावत-कछवाहा पटै । कहीजे । सेखावतारो २२ जोगीदास । उतन अमरसर वैसगो। १८ कपूरचंद दासारो। १५ मोकल बालरो, जिणनूं | १६ रूपसो। पीर वहांन चिसती १६ वैरसी । निवाजस की, जिणरो . १७ लालो नरूरो। लालो तकियो मनोहरपुर गांव राव कहांणो। ताळे छै, डूंगरी ऊपर। १८ ऊदो लालारो। १६ सेखो मोकलरो, जिससूं १६ लाडखांन ऊदारो। सेखावत कहांणा । ... २० फतेसिंघ लाडखांनरो । अमरसर सेखैजी वसायो। तिणनूं राजा जैसिंघ अमरसर अमरै अहीररी बेटो कर गोद लियो ढांगी थी, जात थो । खासोदो। सिखरगढ़ I वलभद्रका वेटा गोविंददास, ईश्वरदास कंपावतका दोहिता जो जोधपुर महाराजाके यहां नौकर था और जिसे रेवाड़ीके गांव पट्टेमें मिले हुए थे। 2 लाला राव कहलाया। 3 लाडखानके वेटे फतहसिंहको वेटा मान कर गोद लिया था। 4 राजा जयसिंह इसे अपने वेटोंके वरावर मानता था । कामा पहाडीका सूबेदार था। 5 उदयकर्णका पुत्र वालोजी जिसकी औलाद वाले शेखावत-कछवाहा कहे जाते हैं। शेखावतोंका निवासस्थान अमरसर । 6 मोकल वालेका पुत्र जिस पर शेख पीर बुरहान चिश्तीने कृपा की (और पुत्र दिया) जिसका तकिया मनोहरपुरके निकट पहाड़ी पर बना हुआ है।
SR No.010609
Book TitleMunhata Nainsiri Khyat Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorBadriprasad Sakariya
PublisherRajasthan Prachyavidya Pratishthan Jodhpur
Publication Year1960
Total Pages377
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size17 MB
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