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________________ ३०४ ] मुंहता नैणसीरी ख्यात २२ हिरदैनारायण । रावळा गांव ४, मेड़तारो गांव गांगरड़ो दियो यो । २१ सकतसिंघ राजा श्रासकरणरो । २२ गोविंददास । २३ भावसिंग । १६ सुरतांण राजा प्रथीराजरो । २० तिलोकदास | दसमतखांनसूं विढ मुंवो' । २१ केसोदास मीच मुंवो । २२ सिंघ । २० सुंदरदास सुरतांगरो । २१ नरसिंघदास । २० वाघ सुरतांणोत । २१ उग्रसेण । २० मोहणदास सुरतांणोत । २० सकतसिंघ सुरतांणोत । 2 २१ सहदेव सकतावत | २१ देवसिंघ, वीठळदास गोंड़रै कांम आयो, रजा बाहदर साथै । २२ सुजांगसिंघ, राजा वीठळदासरै चाकर । १६ जगमाल राजा प्रथीराजरो । २० खंगार जगमालोत । जिण खंगाररा खंगारोत - कछवाहा नराइणारा धणी छै । 4 २१ नराइणदास खंगारोतनूं अकवर पातसाह नराइणो पर्ट उतन कर दियो । २२ दुरजणसाल नराइणदासरो । I मारवाड़ राज्यकी श्रोरसे मेड़ताका गांगरड़ा गांव और चार गांव और दिये गये थे। 2 दममतखांसे लड़ कर मरा । 3 देवीसिंह रजा बहादुरके साथ विट्ठलदास गोड़के. काम आया। 4 जगमालका वेटा खंगार, जिसके वंशज खंगारोत कछवाहे नराणाके स्वामी हैं ।। 5 संगारके वेटे नारायणदासको वादशाह अकबर ने नराणा पट्ट और वर्तन कर दिया
SR No.010609
Book TitleMunhata Nainsiri Khyat Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorBadriprasad Sakariya
PublisherRajasthan Prachyavidya Pratishthan Jodhpur
Publication Year1960
Total Pages377
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size17 MB
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