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________________ णमोऽत्थु णं समणस्स भगवओ णायपुत्तमहावीरस्स सुत्तागमे तत्थ णं णिसीहसुत्तं पढमो उद्देसो जे भिक्खू हत्थकम्मं करेइ करेंतं वा साइजइ ॥ १॥ जे भिक्खू अंगादाणं कटेण वा किलिंचेण वा अंगुलियाए वा सलागाए वा संचालेइ संचालेंतं वा साइजइ ॥२॥ जे भिक्खू अंगादाणं संवाहेज वा पलिमद्देज वा संवाहेंतं वा पलिमदेंतं वा साइज्जइ ॥३॥ जे भिक्खू अंगादाणं तेल्लेण वा घएण वा णवणीएण वा अब्भंगेज वा मक्खेज वा भिलिंगेज वा अभंगेंतं वा मक्खेंतं वा भिलिंगेंतं वा साइजइ ॥ ४ ॥ जे भिक्खू अंगादाणं कक्केण वा लोद्धेण वा पउमचुण्णेण वा ण्हाणेण वा सिणाणेण वा चुण्णेहिं वा वण्णेहिं वा उव्वट्टेइ वा परिवठूइ वा उव्वटेंतं वा परिवढेतं वा साइजइ ॥ ५॥ जे भिक्खू अंगादाणं सीओदगवियडेण वा उसिणोदगवियडेण वा उच्छोलेज वा पधोवेज वा उच्छोलेंतं वा पधोवेंतं वा साइजइ ॥ ६॥ जे भिक्खू अंगादाणं णिच्छल्लेइ णिच्छल्लेतं वा साइजइ ॥ ७॥ जे भिक्खू अंगादाणं जिं(जिर)घइ जिंघेतं वा साइज्जइ ॥ ८॥ जे भिक्खू अंगादाणं अण्णयरंसि अचित्तंसि सोयंसि अणुप्पवेसेत्ता सुक्कपोग्गले णिग्याएइ णिग्घायंतं वा साइजइ ॥ ९॥ जे भिक्खू सचि(त्तं)त्तपइट्ठियं गंधं जिंघइ जिंघतं वा साइज्जइ ॥ १० ॥ जे भिक्खू पयमग्गं वा संक्रमं वा अवलंबणं वा अण्णउत्थिएण वा गारथिएण वा कारेइ कारेंतं वा साइज्जइ ॥ ११ ॥ जे भिक्खू दगवीणियं अण्णउत्थिएहिं वा गारथिएहिं वा कारेइ कारेंतं वा साइज्जइ ॥ १२ ॥ जे भिक्खू सिक्कगं वा सिक्कगणंतगं वा अण्णउत्थिएण वा गारथिएण वा कारेइ कारेंतं वा साइज्जइ ॥ १३॥ जे भिक्खू सोत्तियं वा रज्जुयं वा चिलिमिलिं वा अण्णउत्थिएण वा गारथिएण वा कारेइ कारेंतं वा साइजइ ॥ १४ ॥ जे भिक्खू सूईए उत्तरकरणं अण्णउत्थिएण वा गारथिएण वा कारेइ कारेंतं वा साइजइ ॥ १५ ॥ जे भिक्खू पिप्पलगस्स उत्तरकरणं अण्णउत्थिएण वा गारथिएण वा कारेइ कारेंतं वा साइजइ ॥ १६ ॥ जे भिक्खू णखच्छेयणगस्सुत्तरकरणं अण्णउत्थिएण वा गारथिएण ५४ सुत्ता.
SR No.010591
Book TitleSuttagame 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorFulchand Maharaj
PublisherSutragam Prakashan Samiti
Publication Year1954
Total Pages1300
LanguagePrakrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, agam_aupapatik, agam_rajprashniya, agam_jivajivabhigam, agam_pragyapana, agam_suryapragnapti, agam_chandrapragnapti, agam_jambudwipapragnapti, & agam_ni
File Size93 MB
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