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तरफयी तीर्थमान पहेरावी सघवी पद अर्पण गिरितीर्थनी घणी प्रसिद्धि आ निमित्तथी थर्ड कर्य आज प्रमगे कोल्हापुरना शेठ हिन्दुमलजी अने आ तीर्थनो सारो एवो विकास थयो जितराजजी राठोड अने तेमना धर्मपत्नी सौ सवेगी साधु केवा होय छे तेनु प्रत्यक्ष दर्शन थयु कान्तावेने तीर्थोद्धारने पूरक थवा माटे मोटी भारतना भिन्न भिन्न प्रदेशना लोको तीर्थयात्रा रकमनो चडावो लीधो तेथी ते दपत ने पण करवा आववा लाग्या तीर्थमाळ पहेरावाई आ निमित्ते जिनप्रासाद
सवेगी साधुसाध्वीओनो इतिहास ज्वलत छ उपर, ध्वजा चडाववी एवो विचार आव्यो ने
सर्व समाजने धर्मोपदेश आपी, तेने कर्म मुक्त वखते प्रथम लीधेल ध्वजाना चडावाना हकनु
करवा माटे तेमणे अथाग श्रम लीधेलो छ शु? एवो प्रश्न उपस्थित थयो ने वखते पूज्य
समाजजीवननु नैतिक धोरण उच्चतम रहीने ते गुरुदेवे विवेचन कर्यु के "आपणे जेवी रीतीए
धर्माभिमुख रहे ते माटे तेमना अहर्निश प्रयत्न दररोज स्वच्छ नवा कपडा पहेरी छीये ते
चालु होय छे कलात्मक गगनचुवी भव्य जिना-- प्रमाणे प्रभु प्रामाद उपर दररोज नवी ध्वजा ।
लयो, तीर्थोनो जीर्णोद्धार, यात्राना निमित्तथी चडाववी जोहए प्रभुप्रासाद उपरनी ध्वजा मेली
संघसचार, ग्रथोनी निर्मिती विगेरे कार्यो तेमण घेली अथवा फाटेली न होवी जोइए पछी ते
आपेला स्फुर्तिदायक उपदेशमाथी निर्माण थाय दिवसे नवी ध्वजा चढायवानो चढावो कोल्हा
छे अने निर्माण थयेला छे पुग्ना श्रेण्ठिवर्य बाबुभाई परमारे लई प्रामाद उपर ध्वजा चढावी आ दखने लगभग पाच
पू प्रा आचार्य देवेश श्रीमद् विजय रामचंद्र हजार लोकोनी हाजरी हती
सूरीश्वरजी महाराज तथा तेमना शिप्य समुहना
द महाराष्ट्रना आगमनथी अने विहारथी धर्म पछी वपोरना मर्वजनो महावीर नगरमा
जागृतिनु महान् कार्य थयु तेमना आ विहारथी आव्या पछी नूतन सघवीओनो वरघोडो हाथी
महाराष्ट्रमा साधुसाध्वीओनो विहार अव्याहतपणे उपरथी नीकळ्यो मघवीओओ मुक्त हाथे वरमी ।
गरु थयो दान आप्यु आवी रीते महाराष्ट्रना प्रथम छरी पाळना मधन चौद दिवमनु अबड धर्मसत्र -
. कोल्हापुर श्रीसघनी आग्रहभरी विनती आनद उत्साह अन निर्विघ्नपणे पूज्यश्रीना
__ अनुसार पू पा आचार्यदेव पोताना शिप्यो साथै आशीर्वादथी पार पड्यु
वडगाम मार्गे श्री कुभोजगिरिथी कोल्हापुर
पधार्या तेमना हस्ते बीजु एकाद महान् कार्य थाय आ ममये कोल्हापुरना श्री नेमचद विठ्ठलचद ए कुदरतनी इच्छा हती के शु? कोण जाणे ' शाह ना प्रयत्नथी छत्रपति श्रीमह गजाराम
___ कोल्हापुर लक्ष्मीपुरीमा श्री मुनिसुव्रतस्वामिनु महागजनी सारीएवी पहाय मळी
शिल्पकलामय, नयनरम्य मदीर अनिअल काठमा __ आ धर्ममत्रनु घणु दूग्गामी एव परिणाम । पू. गुरुदेवना उपदेशथी थयु अने तेनो अजनआधु जैनेनरोमा माम मदिगनो न्याग, ब्रह्मचर्य गलाका प्रतिष्ठा महोत्सव पूज्यश्रीना पालन वगेरे तो लेनार महानुभावोन प्रमाण घण थयो ते घटना ऐनिहासिक थई छे हुन महागष्ट्रमा धर्म जागनि आवी श्री कुभोज
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[ श्री कुंभोजगिरी शताब्दि महोत्सव