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स्वर्गगतोयस्य विष
२Balentipur
पाभिविनोज
यस्यास्ति विज्ञानमय
स्वगं गतो यस्य भुविप्रभाव
यस्यास्ति विज्ञानमय स्वभाव । यद्ध्यानत पापगणा क्षयन्ति तत्पार्श्व-जापाद भविनो जयन्ति ।। ६ ॥
मत्स्ययुगल बध
तत्काल
मत्स्ययुगल बन्ध
MVATIME
HOURNA
कुव्य
कुर्वन्ति गगा-धुनितोय-वार
रवा यतो मानमजे सपावें ।। स्तुवन्ति सर्वज्ञमभूत-भूत त भूतभूनाथ सुरा सपार्श्व ।। ७ ।।
कळश बन्ध
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कला बन्ध
श्री कुंभोजगिरी शताब्दी महोत्सव ]