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________________ २०२ मद्रास ओरियण्टल लायब्रेरी, ८ महुडी, १०७ मान्यखेट, ५ मूवी, ६ रत्नागिरि, ६ राजगृह, ३८ राजस्थान, ६ लोहिनीपुर, ३ कलंक, 3 - भट्ट, प्रतिष्ठाकल्प के लेखकों और प्राचार्यों के नाम --कल्याण मंदिर रचयिता, ६ तथा यथाप्रसंग ग्रननव'यं, ७ श्रमरचन्द्रसूरि ३ तथा यथाप्रसंग, अपायं प्रगट नमि, तीर्थकर, ४८ भट्टारक, ६ श्रानन्दि आगर पति १ तथा अन्यत्र श्रयंन इन्द्रनन्दि, ५, ७ उभयभाषा कविशेखर, ५ उमाकान्त गाह ३,१०,१३,६७,९०५-२, उमाम्वाति, ४ एकमधि भट्टारक, ६ कुदकुद, प्राचार्य, ६ कुमुदनन्द्र, वादी, विजयार्ध पर्वत, ८५ विदेह क्षेत्र, ३२ श्रवणबेलगुल, सिन्धु नदी, ४५ स्थिरकदम्ब नगर, ८ हडप्पा, ३ हाथीगुफा ३ हेमग्राम, ५ जैन प्रतिमा विज्ञान स्तोत्र के रचयिता, ८ कल्हण, प्रतिष्ठाचार्य, ७ गुणनन्दी, ५ गुणरत्नाकरसूरी गुणविजय, ३ गुप्ते, आर०एम०, १० चन्दननन्दी, क्षपक, चामुण्डरा ३, ६ जयमेन वगुबिन्दु, ६ तथा अन्यत्र --धर्मरत्नाकर के रचयिता, ६ जगन्चन्द्रसूरा जिनदनसूरी, ५ जिनप्रभसूरी, ५ जिनभद्र, गण, १०५ - वाचनाचार्य, १०५ जिनसेन, भ्राचार्य, १३-६, १०६ जेम्स बर्जेस, १०
SR No.010288
Book TitleJain Pratima Vigyan
Original Sutra AuthorN/A
AuthorBalchand Jain
PublisherMadanmahal General Stores Jabalpur
Publication Year
Total Pages263
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size11 MB
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