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________________ निर्यापकाचार्य-संल्लेखना सम्पन्न कराने वाले आचार्य । निर्वाण - मोक्ष, मुक्ति ; दुःख-निवृत्ति । निर्विचिकित्सा - सम्यग्दर्शन का एक अंग, अभाव, फल प्राप्ति में शंका का अभाव । निर्वेद - संसार, देह, भोग आदि से वैराग्य । निश्चय-नय-द्रव्यार्थिक नय; वास्तविक पदार्थ को ही स्वीकार करने वाला दृष्टिकोण | मिषद्या - आसन ; साधुओ का स्थान, उपाश्रय । - निषेक - कर्म - पुद्गलो की रचना - विशेष | जुगुप्सा का निष्कांक्षा - सम्यग्दर्शन का एक अग, निष्काम भाव, वस्तु, ख्याति, लाभ की इच्छा से राहित्य | निसर्ग - स्वभाव, प्रकृति त्याग । 3 निस्तरण - समाधिपूर्वक मरण ; रत्नत्रय का आमरण निर्दोष आचरण । निह्नव -- सत्य का अपलाप करने वाला; मिथ्यावादी । निःशंका - सम्यग्दर्शन का एक अंग, भय या आशंका से रहित । नील- लेश्या - तीन अशुभ लेश्याओ में से दूसरी ; तीव्रतर । [ ७६ ]
SR No.010280
Book TitleJain Paribhashika Shabdakosha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorChandraprabhsagar
PublisherPrakrit Bharti Academy
Publication Year
Total Pages149
LanguageHindi
ClassificationDictionary
File Size3 MB
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