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Folios - 25 to 33 Language Prakrit
Author Jināyāsa Age of MS..
आदि:
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अंत:
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Catalogue of Palm-Leaf Mss. in the
( 3 ) Pundarikastava ( ३ ) पुण्डरीकस्तव
अन्तः
- C. first half of the 13th century V S
॥ नमो सुदेवया ॥
आरंभेसु नियत्ता सव्वट्टाणे मुक्कावारा । उच्छण्णरागदोसा ते देवा देवयाणं पि ॥ १ ॥
Extent Gāthās 118.
Size - 14.5 X 17 inches Condition Good
सेत्तुंजम्मि वजंतो दाणं जो देइ अस्थिओ पुरिसो । एयारिस य लोए दाणवई दुल्लहो होइ ॥ ११४ ॥ पढमो जो य मणुस्सो संसारे दुक्ख दरिदो य । बीओ य या सुहिओ माणुसजम्मे य सग्गे य ॥ ११५ ॥ नायाधम्मकहाओ सोऊण कहाण्यं सुरेहिं । संखेवेण निबद्धा सेत्तुं कहा य लोगम्मि ॥ ११६ ॥ वीयलंभायणेज्जो सुसाहुगुणपूयओ जिणायासो । ते कहा निम्मविया सेत्तुं परम भक्ती ॥ ११७ ॥ मा हवउ तस्स पावं सारावलिपोत्थयं लिहतस्स । लहउ य जसो य कित्ती अइरेणं साहुसक्खारं ॥ ११८ ॥ छ ॥ पुंडरीकस्तवः परिसमाप्तः ॥
Folios - 34 to 44 Language Prakrit
Age of MSc. first half of the 13th cent VS आदि:
The work is also known as Satrunjayakatha and Sărăvali. (4)_Sukośalacaritra ( ४ ) सुकोशलचरित्र
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Extent - Gāthās 108.
Size - 14.5 X 1.7 inches Condition -Good
अह एतो वीसइमे जिणंतरे वट्टमाणसमयंमि ।
विजओ नाम नरिंदो साएयपुराहिवो जाओ ॥ १ ॥
एयं जो सुणइ नरो भावेण सुकोसलस्स नेव्वाणं
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