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________________ ( २७७ } मनु शास्त्रार्थ नजीबाबाद- --प्र० मोहकम लाल जैन देहली, पृ० ६४ | शाहरा निजात (यानि जैन धर्म के मुतालिक सवाल जवाब बाव जैन भक्तर, प्र० चैन मित्र मंडल देहली, पृ० ३२, १० अव्वल 1 १६२४, प्रा० शुमाली हिन्द की जैन डायरेक्टरी संसार ग्राफिस देहली, पृ० ३०४, व० १९४० । सच्चे मज़हब की इसाई बातें -०० जी० ट्राउट, अनु० पं० भगतराम शर्मा, पृ० २४. व० १६४१ । सच्चे मोतियों की लड़ी - ले० श्रीमती गर्वती देवी, संपा० ना० दीवानचन्द, प्र० जीवदया फंड रावलपिंडी, पृ० २४, ० १६२१, आ० दोयम । सनातन जैन दर्शन प्रकाश (अलमारूफ नीततत्व पदार्थ ) -- ले० स सोहन लाल वकील, पु० ५३४; १० १६०२ | सप्त व्यसन या हफ्तायून - ले० सुमेरचन्द जैन एकाउन्टेंट, प्र० मित्र मंडल देहली, पृ० १६, व० १४२५ । स्तुति व प्रार्थना - ले० व० प्र० मुन्शी रामप्रसाद 'राम'; पृ० ८, व्० १६२४ । स्त्री शिक्षा - ले० व प्र० दयाचन्द्र गोयलीय जयपुर: पृ० ५०, व० १६०६। संकट हरन या मुसद्दसे वीर - ले० दिगम्बर प्रशाद मुख्तार, प्र० जौहरी मल जैन सर्राफ देहली; पृ० १६, प्रा० दोयम | -- सरगुज्रशते कौम (मनम) – ले० बा० भोलानाथ मुस्तार; प्र० जैन संगठन सभा देहली, पृ० १६, व० १६२५ | स्वामी दयानन्द और वेद - ले० स्वामी कर्मानन्द प्र० दिगम्बर जैन शास्त्रार्थं संघ अम्बाला छावनी; पृ० ४८, ० १६३६ श्र० अव्वल । सहरें काजिव - ले० ला० भोलानाथ मुख्तार, प्र० जैन मित्र मंडल देहकी ५० ४०, व० १६२६ / सिल्के सद जवाहर [यानि जैन वैराग शतक मनजुम ] - ले० प्र० भोलानाथ मुस्तार, प्र० जैन मित्र मंडल देहली, पृ० ३२, १६२६ । संपा दीपचन्द जैन, जैन
SR No.010137
Book TitlePrakashit Jain Sahitya
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPannalal Jain, Jyoti Prasad Jain
PublisherJain Mitra Mandal
Publication Year1958
Total Pages347
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size9 MB
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