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जैन शिलालेख संग्रह
३०२
बेहार ( नरसिंहगढ़, मध्यप्रदेश )
प्राकृत - नागरी, १२वीं सदी
...अं घणोममं सुंदरं
१
२ सि
३
| तिहुअणतिलअं सी४ री- शावडस्स अमराल
५ अं रम्मं ॥ श्रीभाण
६ देवेन गाथा वि७ रचिता
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[ ३०२
[ यह लेख सोलखंभ नामक उध्वस्त जैन मन्दिरमे एक स्तम्भपर है । इसमे श्री आणदेव द्वारा लिखित एक गाथा है जो किसी तिहुअणतिलअ ( त्रिभुवनतिलक ) मन्दिर तथा उसके स्थापक शावडके बारेमे है । इसी स्तम्भपर कुछ अन्य व्यक्तियोंके नाम भी खुदे है । गाथाकी लिपि १२वीं सदीकी है । ]
[रि० इ० ए० १९४६-४७ क्र० १७४ ]
३०३
सवणूर ( धारवाड, मैसूर ) १२वीं सदी
कन्नड,
[ यह निसिधि लेख मलधारि आचार्य के समाधिमरणका स्मारक है । तिथि शुचि व० ८, सोमवार, विश्वावसु संवत्सर ऐसी दी है । लिपि १२वीं सदी की है । ]
[रि० इ० ए० १९५२-५३ क्र० ५९ पृ० ३३ ]