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________________ अवळा लगाडता-बेसाडता हता. गुजरातना ए गौरवमां ओर उमेरो करनार गुर्जर साक्षररत्न श्रीयुत केशवलाल हर्षदराय ध्रुव छ के जेमणे पोताना एक देशबंधुए करेला ए 'सुवाच्य ' लेखने स्वकीय प्रतिभाना प्रकाशथी अधिक ओप आपी सर्वना भाटे - सुग्राह्य ' बनाव्यो छे. श्री भगवानलालना निबंधमां जे अपूर्णता हती अने जेना लीधे आखो लेख अस्पष्ट जेवो जणातो हतो तेनी पूर्ति श्रीयुत केशवलाले करी छे अने लेखमांनी दरेक हकीकतने सुसंगत अने स्पष्ट बनावी छे. मगधना जे राजा उपर खारवेले चढाह लइ जइ विजय मेळव्यानो आ लेखमा उल्लेख करेलो छ परंतु त्रुटित पाठना लीधे जेनुं नाम समजी सकातुं नथी, ते श्री केशवलालना विचार प्रमाणे बीजो कोई नहि पण पाटलीपुत्रनो प्रख्यात पुष्यमित्र ज छे के जे छेल्ला मौर्यराजा बृहद्रथनो सेनानी हतो अने जेणे राज्यलोभ वश थई पोताना राजानुं व्यायामभूमिमां कपटथी खून करी, तेना सिंहासननो स्वामी बन्यो हतो. पाछळथी ए ज पुष्यमित्र अश्वमेध यज्ञ करी चक्रवर्ती बन्यो हतो. भाष्यकार पतंजलि अने स्वप्नवासवदत्तादि नाटककार महाकवि भास ए ज पुष्यमित्रना आश्रित हता. आवी रीते खारवेलने पुष्यमित्रनो विजेता बनावी तेना लेखना बधा अव्यवस्थित अंकोडाओने यथास्थाने गोठवी ई. स. पूर्वेना बीजा सैकानी खंडित ऐतिहासिक शृंखलाने अखंड बनावी छे. जाते ' महामेघवाहन ' होवा छतां पण क्रूर कालना कठोर पंजामां सपडाई जई बे हजार वर्ष सुधी ऐतिहासिक अंधकारवाळी उंडी गुफामां पड़ी रहेला ए खारवेलना जीर्ण-शीर्ण नामने पोतानी प्रतिभाना किरण वडे आकर्षी वौसमी सदीना वैद्युतिक आलोकवाळा विज्ञ जगतना विचारोद्यानमा लावी मूकवावाळु पतितोद्धारक ' केशव ' कृत्य सुजनो द्वारा अवश्य स्तुत्य ज छे. "Aho Shrut Gyanam"
SR No.009685
Book TitlePrachin Jain Lekh Sangraha Part 1
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJinvijay
PublisherAtmanand Jain Sabha
Publication Year1917
Total Pages124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari & History
File Size4 MB
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