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यहां भी किया जाता हैं। इस नियम से ऋतुसंधिके 14 दिनों में ऋतुके नियमों का त्याग और पालन निम्न चक्र के अनुसार किया जाता है।
ऋतु सन्धि 14 दिन का
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A
H
A
N
त्याज्य
सेवनीय पूर्व ऋतु का आहार | उत्तर ऋतु का आहार
दिन
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. 1 भाग
प्रथम दिन
3 भांग द्वितीय दिन सम्पूर्ण 4 भाग तृतीय दिन 3 भाग चतुर्थ दिन
| 2 भाग और छठे दिन | 3 भाग वें दिन 2 भाग B वें दिन
2 भाग 2,10,11, वें दिन | दो-दो भाग . h2 वें दिन |1 भाग h3 वें दिन
4 वें दिन 1 भाग 15 वें दिन | 15 दिन से आगे
1 भाग 2 भाग 1 भाग 2 भाग 3 भाग दो-दो भाग 3 भाग 4 भाग 3 भाग सम्पूर्ण
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असात्म्य का तात्पर्य जो अपने आत्मा प्रकृति से न मिलता हो पर यदि लगातार उन वस्तुओं का सेवन किया जाता है तो वह विपरीत होते हुए भी अनुकुल हो जाता है। और यदि सहसा वस्तु का सेवन किया जाय तो वह आत्मा या प्रकृति के अनुकुल नहीं होता है। इसे ही अंसात्म्य कहते हैं। शनैः शनैः सेवन किया गया आहार यदि वह विषाक्त हो तो भी अभ्यास से वह सात्म्य हो जाता है। और यदि हितकर वस्तु हो और उसका सेवन सहसा किया जाय तो वह हानिकर होता है। इसलिये ऋतुओं में सेवनीय आहार विहार के लिये ऋतुसंन्धि का निर्देश किया गया है।
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