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________________ ३६६ जीवाभिगमसूत्र सम्बन्धं कुर्वन्ति, अपेगश्या देवा देवुकड़ियं करें ति-अन्येकका देवा देवोत्कलिका देवानां वातस्येवोत्कलिका-तां कुर्वन्ति, 'अप्पेगइया देवा कहकह करें ति'-अप्येकका केचन देवाः देवकहकई कुर्वन्ति-प्रभूतानां देवानां प्रमोदवान् म्वेच्छावचनैः केलिर्देव कहकहस्तं कुर्वन्तीत्यर्थः। 'अप्पेगल्या देवा देवदुहदुई करेंति'-अप्पेकका देवा देव दुहदुहुकं (अनुकरणमेतत्) कुर्वन्ति । 'अप्पेगल्या देवा देवसंनिवायं देयउकलियं-देवकहकह-देवदुहदुहं करेंति-अपि केचन देवाः देवसन्निपात-देवा. कलिका-देव कहकहक-देव दुहदुहकं कुर्वन्तिः । 'अप्पेगइया देवा देवुजार्यकरेंति'-अप्येकका देवा देवोद्योतं कुर्वन्ति, 'अप्पेगइया देवा विज्जुयारं करेंति' -अप्येके केचन देवा विधुतं कुर्वन्ति, 'अप्पेगड्या देवा चेलुक्खे करेंति'-अप्येकका देवा चैलोरक्षेपं कुर्वन्ति, 'अप्पेगइया देवा देवुज्जोय विजुयारं चेलुक्खेवं ने उस समय देव सन्निपात किया-अर्थात् आपस में बहुत अच्छा सम्बंध किया 'अप्पेगड्या देवा देवुकलियं करें ति' कितनेक देयों ने उस समय देवोत्कलिकाकी-देवों को हवा की तरह नचाया 'अप्पेगइया देवा देव कहकहं करेंति' कितनेकदेवों ने कह कह किया-प्रमोद के वश होकर इच्छानुसार वचनों द्वारा जो देव क्रीडा करते हैं उसका नाम देव कह कह हैं 'अप्पेगड्या देवा देव दुह दुहं करे ति' कितने कदेवों ने उस समय 'दुह दुहक' इस प्रकार का अनुकरण शब्द किया 'अप्पेगइया देवा देवुज्जोय करेंति कितनेकदेवों ने उस समय देवोद्योत किया 'अप्पेगइया देवा, विज्जयारं करेंति' कितनेकदेवों ने उस समयविजलियां चमकाई 'अप्पेगझ्या देवा चे ठक्खेवं करें'ति' कितनेकदेवो ने उस समयवस्त्रों को हवा में फरकाया 'अप्पेगइया देवा देवुज्जोयं, विजुयारं चेलुक्खेवं करेंति' कितनेक देवों ने उस समय देशेद्योत भी ત્તિ કેટલાક દેવોએ એ વખતે દેવસંનિપાત કર્યો અર્થાત્ પરસ્પર ઘણેજ सा२। समयमांध्या. 'आपेगइया देवा देवुक्कलियं करेंति' सार हेवास मे समये हेसि ४री अर्थात् वान वानी रेभ नयाव्या. 'अप्पेगइया देवा देव कहकह करेंति' मा वाय हे ४६४ यो अर्थात् मान १२ जनीन પિતાની ઈચ્છા પ્રમાણેના વચને દ્વારા જે દેવે કીડા કરે છે. તેનું નામ દેવ ४३४१ छ. 'अपेगइया देवा दुहदुहं करेंति' मा वामे से समय हु मा प्रभारीना मनु४२५ शहोना:यार ४यो 'अप्पेगइया देवा देवुज्जोयं करेंति' tee वाये ये सभये हेवायोत ज्यो. 'अप्पेगइया देवा विज्जुयारं करेंति टमा वामे से समये विजीयो यमपी. 'अप्पेगइया देवा चेलुक्खे करेंति' टमा हेवाये ये सभये पसीने १२४०या. 'अप्पेगइया देवा देवुज्जोयं विज्जुयारं चेलुस्खे करेंति' सेटमा हेवारों को समये ठेवायोत पर ध्या, विजी
SR No.009337
Book TitleJivajivabhigamsutra Part 03
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGhasilal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1974
Total Pages1588
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_jivajivabhigam
File Size117 MB
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