________________
Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra
www.kobatirth.org
Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir
ज्ञेय विना सहु शाननी शून्यता जाणीए, षड् द्रव्यो पर्याय अनन्त मन आणीए. अस्ति विना न निषेष घटे कोइ द्रव्यनो, द्विवण नहि अद्वैत निषेध केम सर्वनो . द्वैतर्नु ज्ञान थया वण अद्वैत शुं कहो, भासे ज्ञानमा द्वैत ससभाव सहहो. द्रव्य अने पर्यायथी ज्ञेय अनन्तता, वस्तुधर्म स्याद्वाद त्यां एकानेकता: ध्रुवता लेयना द्रव्यपणे नित्यता खरी, उत्पत्ति व्यय क्षेय अनित्यता अनुसरी. जीवद्रव्य एक व्यक्ति अनादि अनंत छ, गुण पर्यव आधार चेतनजी सन्त छे. बुद्धिसागर जिनवर वाणी सद्दहे, समकित श्रद्धायोगे अपेक्षा सहु लहे.
For Private And Personal Use Only