SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 37
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir पुण्यशील गणि कृत (१) अजितजिनेश्वरविजित मदोद्भट, कटक हत कुमते । भवभयदारुण कारण वारण, दारण हरिणाधिपते ।। विजयांगज महाराज जयजय भुवनाधिपते ॥१॥ घनकर्माचलज्वलनवाला माला कुलशटकोटे अशरणशरण चरण संप्रणता गणित सुरासुर कोटे ॥ विजयांगज महाराज जय जय भुवनाधिपते ॥२॥ व्यसन तरंगा कुलगतिजल, भवजलनिधितारणतरणे । वितत दुरित सुदुरंततिमिरभर, हरण तरुण तर तरणे ॥ विजयांगज महाराज जय जय भुवनाधिपते ॥३॥ अनलधौत कलधौत तनुप्रभ, भवजलधौविनिमग्नम् । करणां कृत्वा करुणाकर मां, तारयपातक लग्नम् ।। विजयांगज महाराज जय जय भुवनाधिपते ॥४॥ केवल कमला निलय दलयताद् गुरु-चिर-संचित दुरितं । त्तिजगदधीश्वरता पदमाधिप-तां मम चाशु कलयतात् ।। विजयांगज महाराज जय जय भुवनाधिपते ॥५॥ विजित शत्रु जितशत्रु नृपान्वय, मौलिमणेशिवभृत हे । यक्षदक्ष महायज्ञान्वितया-जितबल यामिष्टुत हे ।। विजयांगज महाराज जय जय भुवनाधिपते ॥६॥ शर-दुद्भवशिवचन्द्र किरणगण, विमल सुगुणमणिजलधे । द्विरदांकित पदपद्म निरुपमा-नंत शक्तिसुधननिधे । विजयांगज महाराज जय जय भुवनाधिपते ॥७॥ For Private And Personal Use Only
SR No.008512
Book TitleAjitnath Vandanavali
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDharnendrasagar
PublisherSimandharswami Jain Mandir Khatu Mehsana
Publication Year1976
Total Pages143
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Worship
File Size5 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy