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________________ Version 001: remember to check http://www.AtmaDharma.com for updates समयसार १८६ कथमिति चेत्जोधेहिं कदे जुद्धे राएण कदं ति जंपदे लोगो। ववहारेण तह कदं णाणावरणादि जीवेण।।१०६ ।। योधैः कृते युद्धे राज्ञा कृतमिति जल्पते लोकः। व्यवहारेण तथा कृतं ज्ञानावरणादि जीवेन।। १०६ ।। यथा युद्धपरिणामेन स्वयं परिणममानैः योधैः कृते युद्धे युद्धपरिणामेन स्वयमपरिणममानस्य राज्ञो राज्ञा किल कृतं युद्धमित्युपचारो, न परमार्थः। तथा ज्ञानावरणादिकर्मपरिणामेन स्वयं परिणममानेन पुद्गल-द्रव्येण कृते ज्ञानावरणादिकर्मणि ज्ञानावरणादिकर्मपरिणामेन स्वयमपरिणम-मानस्यात्मन: किलात्मना कृतं ज्ञानावरणादिकर्मेत्युपचारो, न परमार्थः। योद्धा करें जहँ युद्ध , वहाँ वह भूपकृत जनगण कहें । त्यों जीव ने ज्ञानावरण आदिक किये व्यवहार से ।। १०६ ।। गाथार्थ:- [ योधः ] योद्धाओंके द्वारा [ युद्ध कृते ] युद्ध किये जानेपर, [ राज्ञा कृतम् ] राजाने युद्ध किया' [इति ] इसप्रकार [ लोकः ] लोक [ जल्पते ] ( व्यवहारसे) कहते हैं [ तथा ] उसीप्रकार [ ज्ञानावरणादि] ज्ञानावरणादि कर्म [ जीवेन कृतं] जीवने किया' [ व्यवहारेण ] ऐसे व्यवहारसे कहा जाता है। टीका:-जैसे युद्धपरिणाममें स्वयं परिणमते हुवे योद्धाओं के द्वारा युद्ध किये जानेपर, युद्धपरिणाममें स्वयं परिणमित नहीं होने वाले राजा में 'राजाने युद्ध किया' ऐसा उपचार है, परमार्थ नहीं है; इसीप्रकार ज्ञानावरणादिकर्मपरिणामरूप स्वयं परिणमते हुवे पुद्गलद्रव्यके द्वारा ज्ञानावरणादि कर्म किये जानेपर, ज्ञानावरणादिकर्मपरिणमनरूप स्वयं परिणमित नहीं होनेवाले आत्मा में 'आत्माने ज्ञानावरणादि कर्म किया' ऐसा उपचार है, परमार्थ नहीं है। भावार्थ:-योद्धाओंके द्वारा युद्ध किये जानेपर भी उपचार से यह कहा जाता है कि 'राजाने युद्ध किया' इसीप्रकार ज्ञानावरणादि कर्म पुद्गलद्रव्यके द्वारा किये जानेपर भी उपचार से यह कहा जाता है कि 'जीवने कर्म किये'। Please inform us of any errors on rajesh@AtmaDharma.com
SR No.008303
Book TitleSamaysara
Original Sutra AuthorKundkundacharya
AuthorParmeshthidas Jain
PublisherDigambar Jain Swadhyay Mandir Trust
Publication Year
Total Pages664
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Philosophy, Religion, & Spiritual
File Size3 MB
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