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________________ - बाईस - ११५ ११९ १२३ १२५ १२६ १२६ १२८ १३१ १३१ १३२ १ الله الله الله मूल द्रव्य मूल द्रव्यों का साधर्म्य और वैधर्म्य प्रदेशों की संख्या द्रव्यों का स्थितिक्षेत्र कार्य द्वारा धर्म, अधर्म और आकाश के लक्षण कार्य द्वारा पुद्गल का लक्षण कार्य द्वारा जीव का लक्षण कार्य द्वारा काल का लक्षण पुदगल के असाधारण पर्याय पुदगल के मुख्य प्रकार स्कन्ध और अणु की उत्पत्ति के कारण अचाक्षुष स्कन्ध के चाक्षुष बनने में हेतु 'सत' की व्याख्या विरोध-परिहार एवं परिणामिनित्यत्व का स्वरूप व्याख्यान्तर से सत् का नित्यत्व अनेकान्त स्वरूप का समर्थन व्याख्यान्तर पौद्गलिक बन्ध के हेतु बन्ध के सामान्य विधान के अपवाद परिणाम का स्वरूप द्रव्य का लक्षण काल तथा उसके पर्याय गुण का स्वरूप परिणाम का स्वरूप परिणाम के भेद तथा आश्रयविभाग ६. आत्रव योग अर्थात् आस्रव का स्वरूप योग के भेद और उनका कार्यभेद स्वामिभेद से योग का फलभेद साम्परायिक कर्मास्त्रव के भेद पच्चीस क्रियाओं के नाम और लक्षण १५१ बन्ध का कारण समान होने पर भी परिणामभेद से कर्मबन्ध में विशेषता or or or or or orroworooronorror १३८ १४८ १४९ १५० १५३ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.008066
Book TitleTattvarthasutra Hindi
Original Sutra AuthorUmaswati, Umaswami
AuthorSukhlal Sanghavi
PublisherParshwanath Vidyapith
Publication Year1976
Total Pages444
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Philosophy, Religion, Epistemology, Tattvartha Sutra, & Tattvarth
File Size9 MB
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