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________________ but in one third part as a rule. The same holds good for the other two type of substances (ananupurvi or non-sequential and avaktavya or inexpressible). विवेचन-उक्त सूत्र का आशय यह है कि संग्रहनयमान्य समस्त आनुपूर्वी आदि द्रव्य शेष अनानुपूर्वी और अवक्तव्यक द्रव्यों के एक तिहाई भाग में होते हैं। आनुपूर्वी, अनानुपूर्वी और अवक्तव्यक द्रव्यों को मिलाकर जो राशि बनती है, उस राशि के तीन भाग करने पर जो तृतीय भाग आये उतनी राशि प्रमाण आनुपूर्वीद्रव्य हैं। द्रव्यों की संख्या में विषमता होने पर भी तीनों की राशियाँ एक समान ही होती है। इसे समझने के लिए चूर्णिकार ने एक उदाहरण दिया है। जैसे एक राजा के तीन पुत्र थे। तीनों ने राजा से घोड़े की माँग की। राजा ने पहले पुत्र को एक घोड़ा दिया। जिसका मूल्य छह हजार रुपये थे। दूसरे को दो घोड़े दिये, उनका मूल्य तीन-तीन हजार था और तीसरे को बारह घोड़े दिये जिनका मूल्य पाँच-पाँच सौ रुपये थे। संख्या की दृष्टि से विषम होने पर भी प्रत्येक राजकुमार के घोड़े समग्र पूँजी के एक तिहाई भाग में आते हैं। चूर्णिकार ने प्रश्न किया है कि पहले अवक्तव्यकसे अनानुपूर्वी विशेषाधिक और उससे आनुपूर्वी असंख्य गुना कैसे कहा? समाधान दिया है कि वह नैगम-व्यवहारनय की दृष्टि से कहा है, यहाँ संग्रहनय की दृष्टि से कथन है। (अनु. चू. हारि. वृ. पृ. १७०) इसी प्रकार अनानुपूर्वी और अवक्तव्यक द्रव्यों के लिए जानना कि वे भी तीसरे-तीसरे भाग प्रमाण हैं। Elaboration—This aphorism implies that all the anupurvi (sequential) substances occupy one third of the total space occupied by all substances including ananupurvi (non-sequential) and avaktavya (inexpressible) substances. In other words if a heap is made of all existing anupurvi (sequential), ananupurvi (non-sequential), and avaktavya (inexpressible) substances and then it is divided into three equal parts the total anupurvi (sequential) substances would be equal to one of the three heaps. Even if there is a variation in the number of substances in a heap the size of the heaps remains same. The commentator (Churni) has given an example to this phenomenon. A king had three sons. All the sons demanded horses from the king. To the first son the king gave just one horse costing 6000 rupees. To the second son he gave two horses costing 3000 rupees each. To the third he gave आनुपूर्वी प्रकरण ( २१३ ) The Discussion on Anupurvi Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.007655
Book TitleAgam 32 Chulika 02 Anuyogdwar Sutra Part 01 Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmarmuni, Tarunmuni, Shreechand Surana
PublisherPadma Prakashan
Publication Year2001
Total Pages520
LanguagePrakrit, English, Hindi
ClassificationBook_English, Book_Devnagari, Agam, Canon, Ethics, Conduct, & agam_anuyogdwar
File Size18 MB
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