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________________ Fructuuuuuuuuuu र सोलहवाँ अध्ययन ः अमरकंका ( १९५ ) र तए णं सा सूमालिया जाव ‘गए णं से दमगपुरिसे' त्ति कट्ट ओहयमणसंकप्पा जाव झियायइ। SI 5 सूत्र ६० : भिखारी ने सागरदत्त का यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। वह सुकुमालिका के साथ दी 5 शयनागार में गया और उसके साथ एक शय्या पर सोया। सोने पर उस द्रमुख-भिखारी ने भी सुकुमालिका के शरीर के स्पर्श को वैसा ही अनुभव किया द 15 जैसा सागर को हुआ था। वह शय्या से उठकर शयनागार से बाहर निकला और अपने ठीकरे । उठाकर वहाँ से ऐसे भाग कर गया जैसे वधस्थल से मुक्त हुआ काक भाग जाता है। ___ 'वह भिखारी भी भाग गया' यह जानकर सुकुमालिका पुनः भग्न मनोरथ निराश होकर शोक ई र में डूब गई। > DESERTED AGAIN 60. The beggar accepted the proposal of Sagardatt. He went to the bedroom and slept in the bed with Sukumalika. On sleeping beside her the beggar also found the touch of Sukumalika just as Sagar had found it. He got up from the bed, came out of the room, ट collected his earthenware, and ran away as if a ghost was chasing him. When Sukumalika came to know that the beggar had also run away she became sad, dejected, and depressed. __सूत्र ६१ : तए णं सा भद्दा कल्लं पाउप्पभायाए दासचेडिं सद्दावेइ, सद्दावेत्ता एवं वयासी, डा र जाव सागरदत्तस्स एयमलृ निवेदेइ। तए णं से सागरदत्ते तहेव संभंते समाणे जेणेव वासहर र तेणेव उवागच्छइ, उवागच्छित्ता सूमालियं दारियं अंके निवेसेइ, निवेसित्ता एवं वयासी-'अहो णंद 5 तुमं पुत्ता ! पुरा-पोराणाणं जाव पच्चणुब्भवमाणी विहरसि, तं मा णं तुमं पुत्ता ! र ओहयमणसंकप्पा जाव झियाहि, तुम णं पुत्ता ! मम महाणसंसि विपुलं असणं पाणं खाइम टे 15 साइमं जहा पोट्टिला जाव परिभाएमाणी विहराहि।' र सूत्र ६१ : दूसरे दिन प्रातःकाल भद्रा सार्थवाही ने दासी को बुलाकर दतोन पानी आदि देकर 5 सुकुमालिका के कक्ष में भेजा। वहां उसे उदास बैठी देखा, तब दासी ने लौटकर सारी घटना द 5 सागरदत्त को बताई (सागर दारक के कथन के समान) । सागरदत्त दु:खी मन से शयनागार में 1 र गया और सुकुमालिका को गोद में बैठा कर बोला- “हे पुत्री ! तू पूर्वजन्म में किए हिंसा आदि । 5 दुष्कृत्यों द्वारा उपार्जित पापकर्मों का फल भोग रही है। अतः दुःख मत कर। हे पुत्री ! मेरी द 5 भोजनशाला से विपुल आहार सामग्री आदि श्रमणों ब्राह्मणों आदि को दान करती हुई अपना जीवन S र बिता।" (अ. १४ सू. २७ के समाने)। 61. In the morning Bhadra called a maid servant and sent her to 5 Sukumalika's room with water and other things for brushing teeth and SI 15 CHAPTER-16 : AMARKANKA __ (195). sannnn00000000000000nnnnnnnnnn Uuuuuuuu Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.007651
Book TitleAgam 06 Ang 06 Gnatadharma Sutra Part 02 Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmarmuni, Shreechand Surana, Surendra Bothra, Purushottamsingh Sardar
PublisherPadma Prakashan
Publication Year1997
Total Pages467
LanguagePrakrit, English, Hindi
ClassificationBook_English, Book_Devnagari, Agam, Canon, Ethics, Conduct, & agam_gyatadharmkatha
File Size13 MB
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