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________________ मनकल ता सहावोजावमा समर्थी कुव्वन्त इत्यर्थः प्रयातोश्य पडिक तत्ति गुरू समीपे भजताथोचना योजयन्त दुप्पापमापति बुत्पाद्यमाना देवत्व मत्यनीकताजम्यं च किस्वित्विि माया एव देवमध्ये तो दोपादनिष्ठायेत्यर्च एतेषां च विशिष्टवामाजन्य वषत्तारोभवति सेडिंतिसिंगतौ तेरससागरोवमाठितो अखारा हका सेस तचेत्र १५ सेन्जेमे सखिचि दियतिरिक्तभोगिया पव्जत्तयाभवति तजहा जलयरा वहयरा थलयरा तेसिणं रथे गद्द्याचं सुभेगारिया मे पसर्योत्र अञ्लवमाषेहि लेसात्रिं विसुक्कमाचाहि सहावरणिनाय ममायं खभोवसमय दूहातहमणगवे नमो गुरुनइसमौप पालो वचनश्च विवर प्रथपकिमत्र तेहदोषवको पच निवयं श्वर कासमासेवा समरणप्रवसरप्रस्तावमा विपत्रकात मरणक रोग पोपट तब नामाचोक रूप देवलोक तेघनभूषिपत्र ठेवतामहि किलिपियाग टेकमायदेवता देवताम िव िषयाने तापचर देवश म्याईचपत्रिवभोजपअपहार उत्पतिपाम तिहांतेजोवनीगतिविधानपूजा तेरसागरोपममीते हनोति थितिहर दमको खिपस्योपम एकसागरोपमत्रत्रयच्चवार्तरसागरोपमनोबिति प्रमाराधक भगवंत मी आज्ञानाचा राघवनहर से वो याक मिज पूर्वितोपरद्र १५ ते मेह प्रत्यलोकन विषमवर्त्तश्वर संधियागर्भ व पंचेद्रियपांच द्रियमाधारण तिर्वचयोनिमाखपना पर्याप्ता सघ सो पर्याति पूराभयतिवयम् ने शहर परमाशिलाबाशिवाप्रमुख सचरथको कामको प्रसुपर वसचरडाबोवोडामसुष१ तेहवनभयेगइया यंत्रातस्तचरथलचरप परादिक मशुममनीश्वरजीवसवं पौपरिणाममान विशेषकरोन प्रसस्त सर्वे [त्तमभवत् अध्यवसाय मन नाभावार्य विशेषर करो सेभ्यातेजोलेश्या दिव विश्व ᄋ
SR No.007378
Book TitleAgam 12 Upang 01 Aupapatik Sutra Shwetambar
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRai Dhanpatsinh Bahadur
PublisherRai Dhanpatsinh Bahadur
Publication Year1896
Total Pages466
LanguageSanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, Conduct, & agam_aupapatik
File Size9 MB
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