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________________ इसप्रकार क्षणिक उपादान के अनन्तर पूर्व क्षणवर्ती पर्याय युक्त द्रव्य क्षणिक उपादान कारण और तत्समय की योग्यतारूप क्षणिक उपादान कारण - ये दो भेद हो जाते हैं। इन्हें संक्षेप में अनन्तर पूर्व क्षणवर्ती पर्याय और तत्समय की योग्यता भी कहते हैं। उपादान कारण के उक्त भेद-प्रभेदों को चार्ट द्वारा इसप्रकार स्पष्ट कर सकते हैं - उपादान कारण क्षणिक उपादान त्रिकाली उपादान अनन्तरपूर्वक्षणवर्ती पर्याय युक्त द्रव्य तत्समय की योग्यता प्रश्न ११ : इन तीनों उपादान कारणों के पर्यायवाची नाम लिखिए। उत्तर : इन तीनों उपादान कारणों में से त्रिकाली उपादान के ध्रुव, नित्य, द्रव्य - शक्ति, स्वभाव का नियामक, असमर्थ उपादान कारण, भिन्नकारण, सहज-शक्ति, मूल स्वभाव, पारिणामिक भाव इत्यादि अनेक पर्यायवाची नाम हैं। क्षणिक उपादान कारणों में से अनन्तर पूर्व क्षणवर्ती पर्यायविशिष्ट द्रव्यरूप पहले क्षणिक उपादान कारण के पर्याय- शक्ति, समर्थ उपादान कारण, पुरुषार्थ का नियामक, अनित्य, भिन्न- कारण इत्यादि अनेक पर्यायवाची नाम हैं। तत्समय की योग्यतारूप दूसरे क्षणिक उपादान कारण के सामर्थ्य, शक्ति, पात्रता, काललब्धि, भवितव्यता, काल का नियामक, अभिन्नकारण इत्यादि अनेक पर्यायवाची नाम हैं। प्रश्न १२ : कार्य के कारणों में त्रिकाली उपादान को कारणरूप में बताने का प्रयोजन क्या है ? उत्तर : कार्य के कारणों में त्रिकाली उपादान को कारणरूप में बताने के कुछ मुख्य प्रयोजन निम्नलिखित हैं - १. कार्यरूप परिणमित होनेवाले द्रव्य-स्वभाव का ज्ञान कराना ही इस त्रिकाली उपादान को कारणरूप से बताने का मुख्य प्रयोजन है । विवक्षित कार्य जब भी होगा तब इस द्रव्य या इस गुण में ही होगा; अन्य द्रव्यों या तत्त्वज्ञान विवेचिका भाग २ / ५०
SR No.007197
Book TitleTattvagyan Vivechika Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKalpana Jain
PublisherA B Jain Yuva Federation
Publication Year2008
Total Pages238
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size20 MB
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