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भगवतीसूरे
४१६ वेमाणियाणं। कइविहाणं भंते! वन्ननिव्वत्ती पन्नत्ता ? गोयमा! पंचविहा वन्ननिव्वत्ती पन्नत्ता तं जहा-कालवन्ननिवत्ती जाव सुकिल्लवन्ननिव्वत्ती। एवं निरक्सेसं जाव वेमाणियाणं। एवं गंधनिबत्ती दुविहा जाव वेमाणियाणं। रसनिवत्ती पंचविहा जाव वेमाणियाणं। फासनिवत्ती अट्टविहा जाव वेमाणियाणं। कइविहाणं भंते ! संठाणनिव्वत्ती पन्नत्ता? गोयमा! छविहा पन्नत्ता तं जहा-समचउरंससंठाणनिव्वत्ती जाव हुंडसंठाणनिव्वत्ती। नेरइयाणं पुच्छा गोयमा ! एगा इंडसंठाणनिव्वत्ती पन्नत्ता। असुरकुमाराणं पुच्छा गोयमा ! एगा समचउरंससंठाणनिव्वत्ती पन्नत्ता एवं जात्र थणियकुमाराणं । पुढवीकाइयाणं पुच्छा, गोयमा! एगा मसूरचंदसंठाणनिव्वत्ती पन्नता एवं जस्स जं संठाणं जाव वेमाणियाणं। कइविहाणं भंते! सन्नानिवत्ती पन्नत्ता ? गोयमा! चउविहा सन्ना निवत्ती पन्नत्ता तं जहा-आहारसन्नानिवत्ती जाव परिग्गहसन्नानिव्वत्ती। एवं जाव वेमाणियाणं। कइविहा णं भंते ! लेस्सा निवत्ती पन्नत्ता ? गोयमा ! छव्विहा लेस्सानिव्वत्ती पन्नत्ता, तं जहा कण्हलेस्सानियत्ती जाव सुक्कलेस्लानिवत्ती। एवं जाव वेमाणियाणं, जस्स जइ लेस्साओ तस्स तइया भाणियहा। कइविहा गं भंते ! दिटिनिवत्ती पन्नत्ता? गोयमा! तिविहा दिटिनिवत्ती पन्नत्ता, तं जहा-सम्मादिट्रिनिवत्ती मिच्छादिटिनिवत्ती, सम्मामिच्छादिटिनिव्वत्ती, एवं जाव वेमा
શ્રી ભગવતી સૂત્ર : ૧૩