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________________ भगवतीसूत्रे इति सर्व संमेलने च द्विवष्ट्यधिकचतुःशत-(४६२) भङ्गा भवन्ति-इति संक्षेपार्थः ॥ सू० ४ ॥ चतुर्नैरयिकाणां कोष्ठकम् पश्चानाम्-एकसंयोगे---७ ,, द्विकसंयोगे-- ८४ ,, त्रिकसंयोगे-२१० , चतुष्कसंयोगे-१४० , पञ्चकसंयोगे- २१ सर्व मेलने---४६२ भङ्गाः विकल्प इससे आते हैं कि-पांच नैरयिकोंके द्विकसंयोगमे सातपदोंके२१ भंग होते हैं-इन भंगों के साथ, नारकों के द्विधाकरण में लभ्यमान १-४, २-३, ३-२, ४-१ इन चार विकल्पों का गुणा करने पर ८४ भंग आ जाते हैं पांच नारकों के त्रिकयोग में १-१-३, १-२-२, २-१-२. १-३-१, २-२-१, ३-१-१ ये छह विकल्प होते हैं सात नरक के त्रिक संयोग में जो ३५ विकल्प हुए हैं सो इन ३५ विकल्पों के साथ इन ६ विकल्पों का गुणा करने पर २१० भंग पांच नैरयिकों के त्रिकसंयोगी आ जाते हैं। पांच नैरयिकों के नरक चतुष्क संयोग में सात पदों के ३५ विकल्प होते हैं सो इन ३५ विकल्पों के साथ नैरयिक के चतु: संयोग से लभ्य १-१-१-२, १-१-२-१, १-२-१-१, २-१-१-१ इन चार विकल्पों का गुणा करने पर १४० भंग आ जाते हैं। पांच नैरयिकों છે.દ્ધિકસોગી ૮૪ વિકલ્પ (ભાંગાઓ) ને હિસાબ આ પ્રમાણે સમજવો– પાંચ નૈરયિકના બ્રિકસંગથી સાત પદનાં ૨૧ ભાં ગાઓ થાય છે. આવા ૨૧ ભાંગાઓવાળા બ્રિકસ ભેગી ચાર વિક૯પ (૧-૪, ૨-૩, ૩-૨, ४-१) थाय छे. तेथी यारे विपना विसया मग पुस २१४४८४ थाय छे पांय नाना सियागमय 1-1-3, १-२-२, २-१-५, 1-3-1, ૨-૨-૧, અને ૩-૧-૧ રૂપ ૬ વિકલ્પ થાય છે. દરેક વિકલ્પની અપેક્ષાએ સાત નરકના ત્રિકસયેગી ૩૫ ભાંગાઓ બને છે, તેથી ૬ વિકલ્પના કુલ ભાંગાઓ ૩૫૪૬=૧૦ થાય છે. પાંચ નરકન નરકચતુષ્ક સંગમાં ૩૫ ભાંગાવાળે દરેક વિક૯પ થાય છે. એવાં ચાર વિકપના (૧-૧-૧-૨, ૧-૧ -२-1, १-२-१-१, २-१-१-१ ३५ या२ वियाना) ४ ३५४४%3D1४० श्रीभगवती. सूत्र: ८
SR No.006322
Book TitleAgam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Prajnapti Sutra Part 08 Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGhasilal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1965
Total Pages685
LanguageSanskrit, Hindi, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Agam, Canon, & agam_bhagwati
File Size40 MB
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