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________________ २६६ नव पदार्थ ३१. जीव क्रोध करें क्रोध री प्रकत सूं, मांन करें मान री प्रकत सूं तां । माया कपट करें छें माया री प्रकत सूं लोभ करें छें लोभ री प्रकत सूं आंम । । ३२. क्रोध करें तिण सूं जीव क्रोधी कहायो, उदे आइ ते क्रोध री प्रकत कहाणी । इण ही रीत मान माया नें लोभ, यांनें पिण लीजो इण ही रीत पिछांणी ।। ३३. जीव हसे छै हास्य री प्रकत उदे सूं, रित अरित री प्रकत सूं रित अरित बघावें । भय प्रकत उदे हुआ भय पांमें जीव, सोग प्रकत उदे जीव नें सोग आवें । । ३४. दुगंछा आवें दुगंछा प्रकत उदे सूं, अस्त्री वेद उदे सूं वेदे विकार । तिणनें पुरष तणी अभिलाषा होवे, पछे वेंतो २ हुवे बोहत बिगाड ।। ३५. पुरष वेद उदे अस्त्री नीं अभिलाषा, निपुंसक वेद उदे हुवे दोयां री चाय । करम उदे सूं सवेदी नांम कह्यों जिण, करमा नें पिण वेद कह्या जिण राय ।। ३६. मिथ्यात उदे जीव हुवो मिथ्याती, चारित मोह उदे जीव हुवो कुकरमी । इत्यादिक माठा २ छै जीव राम नांम, वले अनार्य हिंसाधर्मी । । ३७. चोथो घनघातीयो अंतराय करम छै, तिणरी प्रकृत पांच कही जिण तां । ते पांचूई प्रकत पुदगल चोफरसी, त्यां प्रकृत रा छै जूजूआ नांम ।। ३८. दानांतराय छै दान रे आडी, लाभांतराय सूं वस्त लाभ सके नांहीं । मन गमता पुदगल नां सुख जे लाभ न सके सब्दादिक कांई । ।
SR No.006272
Book TitleNav Padarth
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShreechand Rampuriya
PublisherJain Vishva Bharati
Publication Year1998
Total Pages826
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size15 MB
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