________________
110... प्रतिष्ठा विधि का मौलिक विवेचन
वृक्ष का नाम
दिशा
पीपल
पूर्व
पीपल
पश्चिम, दक्षिण
पाकर
दक्षिण
पाकर
वट
वट
उदुम्बर
उदुम्बर
उत्तर
पश्चिम
पूर्व
उत्तर
दक्षिण
फल
भय
शुभ
पराभव
धनागम
राजकीय कष्ट मनोरथ पूरक
नेत्र रोग
शुभ
स्विच बोर्ड
परवर्तीकालीन मन्दिरों में पर्याप्त प्रकाश के लिए विद्युत का प्रयोग भी किया जा रहा है। वास्तु नियम के अनुसार विद्युत् का मीटर एवं स्विच बोर्ड मन्दिर के आग्नेय कोण में ही लगाना चाहिए। यदि असुविधा हो तो वायव्य कोण में लगायें, किन्तु ईशान में कभी भी न लगायें। पानी की बोरिंग मशीन का स्विच बोर्ड भी इन्हीं दिशाओं में लगाना चाहिए।
पानी की टंकी
यद्यपि जिन मन्दिर में कुआँ अथवा बोरवेल से ताजा पानी का प्रयोग कर लिया जाता है फिर भी छोटे-छोटे कार्यों के लिए पानी की टंकी बनाना अपरिहार्य है।
टंकी बनाते समय निम्नलिखित निर्देशों का पालन अवश्य करें
1. यदि मंदिर में ओवर हैड पानी की टंकी बनाना इष्ट हो तो इसे नैऋत्य कोण में ही बनायें।
2. यदि मन्दिर में भूमिगत जल टंकी बनाना इष्ट हो तो इसे ईशान, उत्तर अथवा पूर्व में बनायें।
3. भूमिगत टंकी इस प्रकार बनायें कि प्रवेश मार्ग उसके ऊपर न आये। 4. किसी भी परिस्थिति में आग्नेय दिशा में पानी की टंकी न बनायें। ऐसा करने से समाज में निरन्तर कलह पूर्ण वातावरण निर्मित हो सकता है । 5. ओवर हैड पानी की टंकी दक्षिण दिशा में बना सकते हैं।